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5 दिन में भरें मेडिकल की 152 खाली सीटें

7 वर्ष पहले
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पटनाहाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद को हर हाल में पांच दिनों के भीतर मेडिकल कॉलेजों की खाली 152 सीटों पर दाखिला लेने को कहा है। विलंब के लिए सरकार और पर्षद को जिम्मेदार ठहराते हुए अदालत ने कहा-अब आधी रात में दीया जलाकर काम करें, ताकि एक भी सीट खाली रहे। अगर एससी, एसटी विकलांग कोटे की 63 सीटों को भरने में सरकार नाकाम रहती है, तो उसे जनरल कोटे से भरा जाए। न्यायमूर्ति वीएन सिन्हा न्यायमूर्ति के लाल की खंडपीठ ने वकील पतांजलि कृषि की लोकहित याचिका पर यह आदेश दिया।

सरकारी वकील ने कहा था-5 दिनों में कैसे होगा दाखिला

सुनवाईके दौरान प्रधान अपर महाधिवक्ता ललित किशोर ने कहा कि आवेदक वकील हैं। उनका मेडिकल कॉलेज में एडमिशन से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए यह याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है। उन्होंने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में 30 सितम्बर के बाद नामांकन नहीं हो सकता। राज्य सरकार और संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद के लिए ऐसी स्थिति में पांच दिनों में सीटें भर पाना असंभव है।

सरकार ने क्यों नहीं माना आदेश

अदालतने नाराजगी जताई कि हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने मई में ही मेरिट लिस्ट से आरक्षित कोटे में जाने वाले 89 सीटों को भरने का आदेश दिया था लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। अब कहा जा रहा है कि 18 सितंबर को उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया गया है।

10हजार की जगह 2 हजार डॉक्टर हैं, फिर भी ये रवैया

कोर्टने कहा-राज्य में दस हजार डॉक्टरों के स्वीकृत पद के विरुद्ध केवल दो हजार डॉक्टर ही काम कर रहे हैं। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेजों की सीटें खाली रखी जा रही हैं।