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मौर्यकालीन इतिहास में है मंदिर का जिक्र

7 वर्ष पहले
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मोरगांव स्थित मां भगवती स्थान में वैसे तो पूरे साल भक्त आते हैं पर नवरात्र में इस पवित्र स्थान की शोभा बढ़ जाती है। ऐतिहासिक कालखंडों को समेटे इस मौर्यकालीन मंदिर में नवरात्र पर मां भगवती का भव्य शृंगार यहां की खासियत है। अनादि काल से नीम के एक विशाल पेड़ के नीचे मां भगवती विराजित थी। मौर्यकालीन इतिहास में भी मोर गांव की चर्चा है और गांव जब से बसा तब से लोग मां भगवती को पूजते आए हैं पटना विश्वविद्यालय में इतिहास के पूर्व शिक्षक और कुलपति रहे केके दत्ता ने भी अपनी किताब में मोर गांव का जिक्र किया है।

बुद्धिष्ट सर्किट का अध्ययन करने आए एक दल ने भी मोकामा के मोर गांव का रुख किया था। अध्ययन दल में शामिल इतिहासकारों ने भी गांव और मंदिर को मौर्यकालीन बताया था। विश्वभारती विश्वविद्यालय शांति निकेतन के इतिहास के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार कहते हैं कि प्राचीन इतिहास की पुस्तकों से इस गांव के मौर्यकालीन होने की जानकारी मिली है और मंदिर में संग्रहित मूर्तियों के अवलोकन से भी उन मूर्तियों के मौर्यकालीन होने के प्रमाण मिलते हैं। पटना से करीब नब्बे किलोमीटर पूरब मोकामा से पहले एन एच 31 किनारे मोर गांव स्थित मां भगवती जहां विराजमान हैं वहां पहले जंगल हुआ करता था घने जंगलों में नीम के पेड़ के नीचे मां भगवती विराजित थी स्टेशन की तरफ जाने वाली सड़क पर आज मां भगवती स्थान को भव्य मंदिर का रूप दिया जा रहा है मंदिर के पुजारी शशिभूषण तिवारी ने बताया कि अनादि काल से इस मंदिर का अस्तित्व है।मोर पूर्वी पंचायत के सरपंच दिनकर कुमार, ग्रामीण मनोज कुमार, सुमन सिंह, राजेश कुमार, रघुराम शर्मा ने बताया कि मोर और आसपास के गांवों में हर शुभ कार्य में लोग मां भगवती का आशीर्वाद लेने आते हैं। नवरात्र में नौ दिनों तक मां भगवती का भव्य शृंगार किया जाता है। इस मौके पर हजारों श्रद्धालु मां के श्रृंगार के साक्षी बनते हैं। लोगों की मान्यता है कि मां भगवती के दरबार में मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है

बख्तियारपुर/दनियावां।शैलपुत्रीकी पूजा-अर्चना के साथ ही गुरुवार से नवरात्र पूजा प्रारंभ हो गया। नवरात्र पर प्रसिद्ध जगदम्बा मंदिर, रबाईच काली स्थान मंदिर, डाकबंगला परिसर स्थित नवदुर्गा मंदिर, बख्तियारपुर बाजार स्थित काली मंदिर, दनियावां बाजार, फरीदपुर बाजार, मछरियावां आिद जगहों पर पूजाअर्चना की जा रही है।