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इन बातों का रखें ख्याल

7 वर्ष पहले
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> फेफड़े और हृदय का अन्योन्याश्रय संबंध है। एक-दूसरे की कार्य प्रणाली से प्रभावित होती है। जाड़े में नाक, गले एवं सांस की नलियाें का संक्रमण (रेसपाइरेटरी इनफेक्शन) का खतरा बढ़ जाता है। एलर्जी एवं दमा के दौरे ठंड में ज्यादा पड़ते है। फेफड़े के ये स्त्री रोग कालान्तर में हृदय को प्रभावित करते है (पलमोनरी हाइपरटेशन) से।

> ठंड के दिनों में व्यायाम एवं शारीरिक श्रम काफी कम होने लगता है जिस कारण वजन बढ़ता है ब्लड प्रेशर एवं रक्त चर्बी अनियंत्रित होता है। इन्ही तथ्याें की वजह से शरद ऋतु हृदय रोगियों के लिए दुश्वारियां लेकर आती है।

30 मिनट

रोजानायोग और ध्यान करें।

7 घंटे

रोजानानींद लें। नींद दिल को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।

कम