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बन रहा कन्वेंशन हॉल, दरक रहा हॉस्टल

7 वर्ष पहले
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मगधमहिला कॉलेज के बगल में कन्वेंशन हॉल के निर्माण कार्य से कल्याण हॉस्टल की दीवार में दरार पड़ गई है। लोहे के ढांचे जब जमीन पर गिरते हैं तो हॉस्टल की बिल्डिंग में कंपन-सा होने लगता है। कमरों में मौजूद अलमारी, बिस्तर और टेबल िहलने लगते हैं। इतना ही नहीं, हॉस्टल में रहनेवालीं छात्राएं कन्वेंशन हॉल के िनर्माण में लगे कर्मचारियों से भी परेशान हैं। छात्राओं का कहना है कि वहां के लोग फब्तियां कसते हैं। इस बाबत छात्राओं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

स्टाफक्वार्टर के लोग परेशान

हॉस्टलमें रहने वाली सभी छात्राएं दलित महादलित परिवार से हैं। उनका कहना है कि मगध महिला कॉलेज में वहां के स्टाफ के लिए क्वार्टर बने हैं। जब से निर्माण शुरू हुआ, स्टाफ क्वार्टर टूट कर गिर रहा है। छात्राओं का कहना है कि सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। छात्राओं की परेशानी समझनी चाहिए। आिखर हम पढ़ाई कैसे करेंगे।

हमेशाडरी रहती हैं बुजुर्ग ललिता

ललितादेवी ने बताया कि उनके क्वार्टर के एक रूम के कोने में जमीन से सीलिंग तक दरार पड़ गई है। बुजुर्ग ललिता देवी को हमेशा डर लगता है कि पूरी छत गिर जाए। दूसरे क्वार्टर में रहने वाले रामजी शाह के यहां पांच दिन पहले एक बच्चे का जन्म हुआ है। उनके परिवार वाले भी डरे-सहमे हैं। रात के सन्नाटे में जब जोर से लोहे पटके जाते हैं, तो क्वार्टर में रहने वाले लोग चौंक जाते हैं।

एकक्वार्टर की आधी दीवार गिरी

कॉलेजके स्थायी स्टाफ राज नंदन राय की मौत पांच दिनों पहले ही हुई है। उनके बेटे अजय कुमार ने बताया- कन्वेंशन हॉल के निर्माण के कारण तीसरे क्वार्टर में साइड की आधी दीवार गिर चुकी है। बच्चे तो बाहर निकलने से भी डरने लगे हैं।

^दिन में जब हम कपड़े सुखाने आते हैं, तो यहां के वर्कर कमेंट और गंदे इशारे करते हैं। रात को पूरा हॉस्टल इतना वाइब्रेट करता है कि हमारे कमरे की खिड़की भी टूट गई है। आिखर प्रशासन क्या चाहता है। क्या हम हॉस्टल छोड़ दें। चित्रारानी, बीए,फर्स्ट ईयर

^यह निर्माण तो रुक नहीं सकता है, लेकिन रात में जो काम होता है वह दिन में किया जा सकता है। इससे पढ़ाई में बाधा नहीं आएगी। छात्राओं को परेशानी हो, इसका ख्याल रखना चाहिए। अर्चनाकुमारी, बीएससी,फर्स्ट ईयर

^रातभर काम चलने से नींद पूरी नहीं हो पाती है। रह-रह कर हॉस्टल की दीवार हिलने लगती है। हम पढ़ाई भी नहीं कर