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उफ ये विशेष अदालतें, इसलिए मौज में रहते हैं आरोपी

7 वर्ष पहले
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यह दो दिसंबर, 1997 की बात है। पूरी दुनिया ने मध्य बिहार के लक्ष्मणपुर बाथे में बिखरी पड़ी लाशों को देखा। लाशें एक दिसंबर की देर रात गिरी थीं। पुलिस ने गिनीं-कुल 58। कुछ की गर्दनें कटी थीं। कई के पेट फाड़े गए थे। लगभग सभी को गोली मारी गई थी। सरकार ने पुलिस की गिनती को माना, इसी हिसाब से मुआवजे के नोट गिने। तब के राष्ट्रपति डा.के.आर.नारायण ने इसे \\\'राष्ट्रीय शर्म\\\' कहा। यह अब तक का सबसे बड़ा नरसंहार था।

17साल बाद भी हत्यारों का पता नहीं



आज(दस दिसंबर, 2014) की तारीख में भी यह पता नहीं है कि आखिर इन्हें मारा किसने? हद है। लाशें गिरीं, मगर गिराई किसने ..., सिस्टम चुप है। वह अपनी चुप्पी की वजह भी नहीं बता पा रहा है। ऐसा नहीं है कि पुलिस ने काम नहीं किया। उसकी तहकीकात और कार्रवाई को आधार बनाकर निचली अदालत (जिला एवं सत्र न्यायाधीश पटना) ने 26 लोगों को इस नरसंहार का दोषी माना। 16 लोगों को फांसी, 10 को आजीवन कारावास की सजा दी। फैसला सुनाते वक्त कोर्ट ने वारदात को \\\'रेयरेस्ट आफ रेयर\\\' से भी ज्यादा माना। यह सब होने में 13 साल गुजर गए। आखिरकार हुआ क्या? 9 अक्टूबर, 2013 को पटना हाईकोर्ट ने सभी 26 आरोपियों को ‘संदेह का लाभ\\\' देते हुए बरी कर दिया। आखिर यह स्थिति आई क्यों? कौन जिम्मेदार है? बेशक, अदालत तो तथ्य और सबूत पर काम करती है। उसके पास ऐसा सबकुछ क्यों नहीं पेश किया गया, जिससे निचली अदालत का फैसला कायम रहता? सरकार ने मामले में अपनी पुलिस को कसूरवार माना? क्यों नहीं माना? ढेर सारे सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि लाशें तो गिरीं, सबने देखी भी थी। लेकिन सिस्टम हत्यारा तय नहीं कर पा रहा है। ऐसे में जनता का सिस्टम पर भरोसा रहेगा? यह सबकुछ कई मायनों में ललित नारायण मिश्र हत्याकांड से भी ज्यादा भयावह नहीं है? इस हत्याकांड में कुछ बड़े बच गए और इस नरसंहार में ...? जब बड़े-छोटे बच ही जा रहे हैं, तो फिर अपराधी को सजा की स्थिति तक पहुंचाने वाले सिस्टम का मतलब क्या है?

अभियोजनकी कमजोरी से होते बरी

अबजरा यह सुनिए। जानिए कि यह स्थिति क्यों है? पटना हाईकोर्ट के जस्टिस वीएन सिन्हा जस्टिस पीके झा एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान कह रहे हैं-‘अभियोजन की लापरवाही से जघन्य अपराध करने वाले अपराधी छूट जाते हैं।\\\' सवाल यह भी है कि ऐसे किसी भी मामले में किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई हुई? ऐसा शायद कोई उदाहरण