हाईकोर्ट में लंबित हैं 115329 मामले
पटना हाईकोर्ट सहित राज्य के विभिन्न जिला तथा अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित मुकदमों की संख्या 20 लाख तक पहुंच चुकी है। इनमें केवल दीवानी और फौजदारी मुकदमे ही शामिल हैं। पटना हाईकोर्ट में 31.3.2012 तक लंबित दीवानी मामलों की संख्या जहां 67975 थी, वहीं फौजदारी मुकदमों की संख्या 47374 थी। दोनों को जोड़ने पर यह संख्या 115329 तक पहुंच जाती है। मौजूदा समय में इसमें इजाफा ही हुआ होगा। राज्य के विभिन्न जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में भी 31.3.2012 तक जहां दीवानी मामलों की संख्या 260900 थी, वहीं फौजदारी मुकदमों की संख्या 1367391 थी। कुल लंबित मामलों की संख्या 1628291 थी। पिछले ढाई वर्षों में इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
पटना हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों का निपटारा कब होगा, किसी को नहीं पता। मुकदमों को तेजी से निष्पादित करने के मुद्दे पर अबतक दर्जनों सेमिनार और गोष्ठियां आयोजित की गईं। लेकिन व्यावहारिक तौर पर अबतक के सारे प्रयास विफल ही साबित हुए। हर साल जितने नए मामले दायर होते हैं, उनमें अधिकांश पर वर्षों तक सुनवाई नहीं हो पाती है। कुछ पुराने मामलों का निपटारा होता है, तो उतने नए मामले जाते हैं। इस प्रकार हर साल औसतन हाईकोर्ट में लगभग एक लाख मुकदमे लंबित ही रहते हैं। इसके अनेक कारण हैं। मुकदमों में किसी किसी पक्ष द्वारा समय लिया जाना। समय पर जवाब दाखिल नहीं किया जाना। सुनवाई की रफ्तार धीमी होना।
ऐसी ही स्थिति लगभग राज्य के जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों की भी है। कुछ मामलों की सुनवाई जल्दी होती है, तो कुछ में काफी लंबा वक्त लग जाता है।
इसके अलावा जितने भी ट्रिब्यूनल हैं, राजस्व न्यायालय, मानवाधिकार आयोग, आयुक्त, डीएम, एलआरडीसी को-आपरेटिव रजिस्ट्रार सहित अनेक छोटी-छोटी अदालतों में भी वर्षों से मुकदमे सुनवाई के लिए लंबित हैं। अगर इन सबको शामिल कर दिया जाय तो यह संख्या 20 लाख के पार पहुंच जाएगी। लंबित मुकदमों के निपटारे के लिए कई बार विशेष लोक अदालतों का आयोजन किया गया, ताकि मुकदमों का निपटारा हो सके। लेकिन अपेक्षा के अनुरूप सफलताएं नहीं मिली। कोर्ट के बाहर आपसी समझौते से मामले को निपटाने के लिए गत 6 दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया था। पटना हाईकोर्ट में जज और वकील को मिलाकर 9 खंडपीठ का गठन हुआ था। कुल 640 मामले लाए गए थे। लेकिन निपटारा हुआ केवल 288 का।
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