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उद्यमियों ने सीखा-कैसे करें कॉस्ट कटिंग

7 वर्ष पहले
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कुछ उदाहरण

फैक्ट्रियांकिस-किस प्रकार से अपने लागत खर्च में कटौती कर सकती हैं, इस विषय पर बुधवार को पटना में प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल(एनपीसी) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दर्जनों उद्यमियों, एनपीसी अधिकारियों और बीआईए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन(बीआईए) सभागार में बिहार के उद्यमियों को प्रशिक्षित किया।

मेटेरियल फ्लो कॉस्ट अकाउंटिग(एमएफसीए) के इस कार्यक्रम की अगुआई एनपीसी के डायरेक्टर पीआर उपाध्याय ने की।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि फैक्ट्रियों में को-आर्डिनेशन और कम्यूनिकेशन के माध्यम से मेटेरियल और ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। जीतेंद्र कुमार सिंह, डिप्टी डायरेक्टर ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से क्रमवार सभी बिंदुओं को समझाया। कार्यक्रम में गुजरात और अन्य राज्यों के कुछेक उद्योगों की चर्चा की गई जो कॉस्ट कटिंग के प्रयासों से बड़ी बचत कर रहे हैं।

बीआईए अध्यक्ष अरुण अग्रवाल, सेक्रेटरी जेनरल सुबोध कुमार एवं केपी झुनझुनवाला ने एनपीसी के प्रयासों पर प्रसन्नता जाहिर की। मौके पर पहुंचे दर्जनों उद्यमियों ने एनपीसी अधिकारियों से कई सवाल किए। वाइस प्रेसीडेंट निशित जायसवाल ने भी जिज्ञासापूर्ण सवाल किए।

सोमानी टाइल्स ने कॉस्ट कटिंग उपायों पर 2 लाख रुपए खर्च किए और महज 2 दिनों में उसे उत्पादन के दौरान 35 लाख की भारी बचत हुई। इसी प्रकार साइनेस्ट ट्यूब्स, भागवती स्फेरो कॉस्ट और बड़ौदा मोल्ड्स एंड डाइस कंपनी ने तकनीकों के नवीकरण को अपना कर लागत कम किया। इससे उन्होंने महज 1 साल में फैक्ट्री के नवीनीकरण पर खर्च हुई राशि का कई गुना लाभ प्रॉफिट के रूप में पा लिया।