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अनुपम कुमार पटना

7 वर्ष पहले
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अनुपम कुमार > पटना

संजयगांधीजैविक उद्यान के एक मादा गैंडे की मौत हो गई। मादा गैंडे गैरी को एंथ्रेक्स नामक बीमारी थी। यह एक प्रकार का बैक्टीरियल इनफेक्शन है, जो बहुत तेजी से फैलती है। मंगलवार दोपहर डेढ़ बजे जू प्रशासन को बीमारी के बारे में पता चला। इससे पहले कि गैरी के इलाज का पुख्ता प्रबंध होता, वह चल बसी। विशेषज्ञों के अनुसार सफाई और देखभाल की कमी आमतौर पर ऐसे बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह होती है।

जानकारीके साथ मौत

पशुपालकसे बीमारी के बारे में सूचना मिलते ही जू के डाक्टर गैरी के केज में पहुंचे। उन्होंने बीमारी के बारे में जानने के लिए गैरी को एक इंजेक्शन दिया। इंजेक्शन के प्रभाव और बीमारी की जानकारी से पहले शाम सात बजे गैरी की मौत हो गई। बुधवार को वेटनरी कॉलेज, पशु उत्पादन संस्थान और पटना जू के 15 डाक्टरों के दल ने गैरी के शव का परीक्षण किया। उस दौरान डाक्टरों को कई ऐसे साक्ष्य दिखे, जो एंथ्रेक्स की पुष्टि कर रहे थे। जू के निदेशक एस चंद्रशेखर के अनुसार मानक प्रक्रिया के तहत एंथ्रेक्स पीड़ित जानवरों का अन्त्य परीक्षण नहीं होना चाहिए, इसलिए बुधवार दोपहर 12 बजे उसे दफना दिया गया।

सेंटियागोसे आई यहां

गैरीकैलिफोर्निया के सेंटियागो जू में जन्मी और पली-बढ़ी थी। पटना जू में गैंडा के प्रजनन कार्यक्रम को बढ़ाने के लिए उसे यहां लाया गया था। उसके बदले यहां से एक नर गैंडा को सेंटियागो भेजा गया था। वर्ष 2007 में एक्सचेंज हुआ था।

चारमाह का गर्भ था

गैडोंके प्रजनन कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में गैरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पहले भी वह मां बन चुकी थी और मृत्यु के समय भी उसे चार माह का गर्भ था। शावक के जन्म के बाद जू प्रशासन गैंडों की संख्या आगे बढ़ने की आस लगाए हुए था। पटना जू में कुछ महीने पहले तक गैंडों की संख्या 14 थी। दो गैंडा के मैसूर जाने और गैरी की मौत के बाद यह संख्या अब घट कर 11 रह गई है। हालांकि, अब भी गैंडों की संख्या के मामले में पूरे दुनिया में यह अव्वल है।

मौतने उठाए कई सवाल

गैरीकी मौत ने कई सवाल उठाए हैं। पशुपालकों ने बीमारी की जानकारी देर से दी और इलाज भी गति से नहीं हो पाया। अलीपुर जू से तुलना करते हुए डीबी स्टार ने पहले ही आगाह किया था कि पशु-पक्षियों की संख्या लगभग समान होने के बावजूद यहां डाॅक्टरों की संख्या अलीपुर जू के आधे से भी कम है। वहा