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दैनिकभास्कर
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शारीरिक रूप से बीमार लोग कब तक सुनेंगे अपशब्द
Áशरीरिकरूप से बीमार चल रहे लोगों के लिए अभद्रता भरे शब्दों का प्रयोग कब बंद होगा? हमारे देश की अलग पहचान इसलिए है कि यहां बहुत आदर्श और आदर का पालन किया जाता है, लेकिन एक नजर हम शारीरिक रूप से बीमार चल रहे लोगों पर डालें तो पता चलता है कि जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग इन्हें पुकारने के लिए होता है, जैसे अपाहिज, लंगड़ा, लोथ, अंधा, लूला, पगला, निशक्त, लाचार आदि गलत है। से शब्दों का प्रयोग बंद करना चाहिए। इसको लेकर कड़े कानून भी बने हुऐ हैं, जिसके तहत जेल ओर जुर्माना का भी प्रावधान है लेकिन कोई पालन नहीं होता।
-सौरभ कुमार, अशोकनगर, कंकडबाग।
स्कूलबसों पर कार्रवाई हो
Áस्कूलबस और ऑटो में बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाया जा रहा है। स्कूल बसों के संचालक नियम-कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, पर सरकार मौन है। क्षमता से अधिक बच्चों को बसों और ऑटो में भरना दुर्घटना को दावत देना है। यहां स्कूल बस संचालकों और पुलिस की सांठ-गांठ दिखाई पड़ती है। अगर ऐसा नहीं होता, तो ओवरलोडिंग नहीं होती।
-राहुलकुमार, पटनाकॉलेज।
अश्लीलगानों पर नियंत्रण हो
Áमैंऑटो रिक्शा चालक संघ एवं प्रशासन का ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं कि जिस प्रकार ऑटो रिक्शा अश्लील गानें बजाते हैं, इससे यात्रियों को मानिसक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। संघ और प्रशासन से अनुरोध है कि उन ऑटो चालकों पर तत्काल नियंत्रण लगाएं, जिससे लोग खासकर महिला यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़े।
-रविकुमार, न्यूबस स्टेैंड, मीठापुर, पटना।
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