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7 वर्ष पहले
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पुराना प्रस्ताव खारिज, केंद्र तैयार करेगा जीएसटी का नया प्रस्ताव

विवाद के ये हैं बिंदु

अवधि विस्तार जरूरी

भास्कर न्यूज| पटना/नई दिल्ली

केंद्रसरकार जीएसटी का नया प्रस्ताव तैयार करेगी। राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की बैठक में इस बात पर सहमति बनी। गुरुवार की सुबह राज्यों के वित्त मंत्रियों ने केंद्र के पुराने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद जेटली के साथ उनकी बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक केंद्र पेट्रोलियम और एंट्री टैक्स को जीएसटी से बाहर रखने पर राजी हो गया है। वह मुआवजे को संविधान संशोधन विधेयक में शामिल करने पर भी सहमत है।

बैठक में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि जीएसटी लागू होने से राज्यों के राजस्व में कमी आएगी। राज्यों को होनेवाले संभावित राजस्व की क्षति की भरपाई का प्रावधान संविधान संशोधन विधेयक में हो ताकि क्षतिपूर्ति को लेकर केंद्र-राज्य में विवाद हो। अंतरराज्यीय बिक्री कर के मामले में आईजीएसटी खाते की राशि को डिविजीबल पुल रखना एक उचित कदम है लेकिन इसमें डेस्टिनेशन सिद्धांत का पालन होना चाहिए।

जीएसटी पर हुई बैठक में शामिल बिहार के वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव।

{पेट्रोलियम उत्पाद : केंद्रइन्हें जीएसटी में शामिल करना चाहता है। राज्य इस पर राजी नहीं हैं। केंद्र तंबाकू और शराब पर भी जीएसटी का इच्छुक है।

{एंट्रीटैक्स :केंद्र इसे भी जीएसटी के दायरे में लाना चाहता है। लेकिन राज्य ऐसा नहीं चाहते।

{मुआवजा: राज्यसरकारें संविधान संशोधन विधेयक में इसे शामिल करना चाहती हैं। केंद्र इससे बचना चाहता है। यह रकम 30,000 करोड़ से ज्यादा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 366 के खंड 29 (क) का संपूर्णता मंे समाप्त किया जाना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसमें सभी वस्तुओं और सेवाओं का सम्मिश्रण नहीं है। संशोधन विधेयक के खंड में उल्लेखित एक वर्ष की अवधि को जीएसटी काउंसिल द्वारा अनुशंसित अवधि तक बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि कर सुधारों को लागू करने के लिए एक साल की अवधि कम होती है। इस बैठक में बिहार का प्रतिनिधत्व वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने किया और उन्हें सहयोग देने के लिए प्रधान सचिव वित्त रामेश्वर सिंह थे।

विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा, राज्यों द्वारा वर्तमान में वसूले