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12घड़ियालोंका दूसरा खेप मंगलवार को पटना जू से वाल्मिकीनगर अभ्यारण्य भेजा जाएगा। पिछले कई सप्ताह से इन घड़ियालों को जिंदा मछली देकर शिकार करना सिखाया जा रहा था ताकि प्राकृतिक वातावरण में ये जीवित रह सकें। खुले जल में भी इनकी पहचान हो सके, इसके लिए भेजने से पहले इनके पूंछ की क्लिपिंग (एक खास ढंग से कटिंग) की गई। इनमें से एक घड़ियाल के शरीर में रेडियो ट्रांसमीटर भी लगाया गया है। नदी में बोट पर लगे रिसीवर के माध्यम से इस रेडियो ट्रांसमीटर के सिग्नल को पकड़ा जाएगा। उसके आधार पर इन घड़ियालों के लोकेशन गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाएगी।
दोखेप पहले ही भेजे जा चुके हैं वाल्मिकीनगर
पहलाखेप पिछले वर्ष 17 अप्रैल को भेजा गया था। उसमें छह घड़ियाल थे। यह मिशन प्रायोगिक स्तर पर था। इसका उद्देश्य यह जांच करना था कि जू के बंद माहौल और पालतू जीवन के अभ्यस्त घड़ियाल प्रकृति के उन्मुक्त वातावरण में जी पाते हैं या नहीं। नदी के बहते जल में घड़ियालों की गतिविधियों और लोकेशन की मॉनीटरिंग के लिए उनके शरीर में दो सेटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए थे, जोे उनके पल पल के गतिविधियों का सिग्नल भेजते रहते थे। इस प्रयोग की सफलता के बाद दो खेप में 24 और घड़ियाल को गंडक नदी में छोड़ने का निर्णय किया गया। इसकी पहली खेप 17 जनवरी को वाल्मिकीनगर भेजी जा चुकी है और उन्हें गंडक नदी में छोड़ा भी जा चुका है। दूसरी खेप मंगलवार को भेजी जाएगी। उन्हें बुधवार को अभ्यारण्य के भीतर ही गंडक नदी में छोड़ा जाएगा। पहले को छोड़, दोनों खेप में सेटेलाइट ट्रांसमीटर की जगह रेडियो ट्रांसमीटर का इस्तेमाल किया गया है क्योंकि यह सेटेलाइट ट्रांसमीटर की तुलना में सस्ता होता है।
76घड़ियाल बचेंगे पटना जू में
पटनाजू घड़ियालों को लेकर बहुत समृद्ध है। इस साल के आरंभ में यहां 100 घड़ियाल थे। उन्हें खिलाने पर अधिक राशि खर्च करनी पड़ती थी और जगह भी कम पड़ने लगी थी। डिस्प्ले के लिए इतने घड़ियालों की जरूरत नहीं थी। ऐसे में घड़ियालों को गंडक नदी में छोड़ने का निर्णय लिया गया। अंतिम खेप भेजने के बाद पटना जू में 76 घड़ियाल बच जाएंगे।
विलुप्त होते जा रहे घड़ियाल
गंगाके घड़ियाल उसकी सहायक नदियों के सिवा अन्य कहीं नहीं पाए जाते हैं। यहां भी उनकी संख्या धीरे धीरे बहुत घट गई है। इसके कारण उनको इनडेंजर्ड स्पेशीज में रखा गया है और संरक्षण का प्रयास शुरू हुआ है। इसी प्रयास के अंतर्गत घड़ियालों को गंडक नदी में छोड़ने का निर्णय हुआ। वाल्मिकीनगर अभ्यारण्य को इसके लिए स्थल के रूप में चयनित किया गया ताकि घड़ियालों को बढ़ने के लिए अधिक सुरक्षित स्थल मिले।
घड़ियालों को बढ़ाने में सहायता मिलेगी
^यहमहत्वाकांक्षीप्रोजेक्ट है। इसमें जू में बाहर से जानवर लाने की बजाए उसे जू से बाहर ले जाकर छोड़ा जा रहा है। गंडक नदी में घड़ियाल छोड़ने से उनकी संख्या को बढ़ाने में सहायता मिलेगी और संरक्षण होगा।
एसचंद्रशेखर
निदेशक,पटना जू
11 मादा और एक नर घड़ियाल आज जाएंगे वाल्मिकीनगर
हो गई क्लिपिंग, बंध गए ट्रांसमीटर, गंडक में जाएंगे 12 और घड़ियाल