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इंटरनेशनल प्लेयर देने वाले कॉलेज को अच्छा ग्राउंड नहीं
मगध महिला कॉलेज का प्ले ग्राउंड दिन-प्रतिदिन छोटा होता जा रहा
अनुपम कुमार > पटना 9334940256
राजधानीकेजिस महिला कॉलेज ने सबसे ज्यादा इंटरनेशनल प्लेयर दिए, उसे ही एक अच्छा प्ले ग्राउंड नहीं नसीब है। मगध महिला कॉलेज के प्ले ग्राउंड का भवन निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वोकेशनल कोर्स के लिए बने भवन ने मैदान के पूर्वी हिस्से पर कब्जा कर रखा है जबकि पश्चिमी हिस्से में इंडोर स्टेडियम बन रहा है। दोनों ओर से सिमटने के कारण इसका आकार इतना छोटा हो गया है कि इस पर किसी आउटडोर गेम या खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन संभव नहीं है।
फैकल्टीकी कमी से पढ़ाई में भी हो रही परेशानी
कॉलेजमें शिक्षकों की बहुत कमी है। यहां 4000 छात्राएं पढ़ती हैं। शिक्षकों के 120 पद स्वीकृत हैं लेकिन 42 शिक्षक ही कार्यरत हैं। शिक्षक छात्र अनुपात 1:25 की जगह 1:95 है। इसके कारण वर्कलोड बढ़ गया है और कक्षाओं के संचालन में समस्या रही है। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए एडहॉक टीचरों का भी सहारा लिया जा रहा है। उनकी संख्या 60 है। एडहॉक टीचरों को प्रति कक्षा केवल 150 रुपए मिलता है और महीने में अधिक से अधिक 40 कक्षाएं ही दी जा सकती हैं।
क्लासरूम नहीं बढ़ने पर दो शिफ्ट में पढ़ाई
कॉलेजमें क्लास रूम जरूरत से बहुत कम है। इसके कारण कक्षाओं के संचालन में असुविधा होती है। कई बार कमरे खाली नहीं मिलने के कारण कक्षाओं का संचालन बाधित हो जाता है। वर्तमान प्राचार्या ने इससे निबटने के लिए दो शिफ्टों में कक्षाओं का संचालन शुरू किया है। पहली शिफ्ट सुबह 7 बजे से और दूसरी 12 बजे से होती है। इससे स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन यह स्थायी निदान नहीं है।
साउंडपॉल्यूशन से छात्राएं हमेशा रहतीं परेशान
कॉलेजकैंपस से सटे भूखंड पर जहां पहले सिटी एसपी का निवास था, अब कन्वेंशन हॉल का निर्माण हो रहा है। इसके निर्माण से छात्राओं की परेशानी बढ़ गई है। साउंड पॉल्यूशन के कारण दिनभर उनकी पढ़ाई बाधित होती है। हॉस्टल में छात्राओं का रहना मुश्किल हो गया है। रात में निर्माण कार्य की ठकठक से उनकी नींद टूट जाती है। निर्माण स्थल के सबसे निकट होने के कारण हॉस्टल नंबर 3 की छात्राएं इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं। उनमें से कई ने इसके कारण सिरदर्द की भी शिकायत की है।
एथलेटिक्स का आयोजन बेहद मुश्किल
^मैदानछोटा हो जाने के कारण खेलकूद के आयोजन में समस्या आती है। एथलेटिक्स का आयोजन बेहद मुश्किल हो गया है। हालांकि इसी में अभ्यास कर लड़कियां बेहतर परफार्मेंस देने का प्रयास करती हैं।
मितालीमित्रा, फिजिकलटीचर
खेल के साथ ही पढ़ाई में भी संसाधनों की कमी से हो रही परेशानी
2013 फेन्सुलिनभूटान
2014 जैसलमेर
2014 जैसलमेर
2014 जैसलमेर
बॉलर को दौड़ने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। इससे तेज बाॅलिंग मुश्किल हो गई है। बैट्समैन को भी प्रैक्टिस के लिए तेज बॉल नहीं मिलती। इससे टूर्नामेंट में उन्हें तेज बॉल को खेलने में परेशानी होती है।
लगातार निर्माण कार्य से मैदान की घास खराब हो गई है। इससे फिल्डिंग बहुत मुश्किल हो गई है। बालू और ईंट-गिट्टी के टुकड़े बिखरे होने से डाइव मारने में डर लगता है और चोट भी लगती है।
कम दूरी की बाउंड्री लाइन खींचकर ही हमें अभ्यास करना पड़ता है। इससे हाथ कम डिस्टेंस पर सेट कर जाता है और अच्छे मैदान में खेलने पर बॉल बाउंड्रीलाइन के बाहर जाने की बजाए कैच हो जाता है।
मैदान का आकार इतना छोटा हो गया है कि स्टैडर्ड डिस्टेंस लेने पर बाउंड्री लाइन मैदान के बाहर चली जाती है। ऐसे में कैसे अभ्यास किया जाए और किस प्रकार अच्छा परफार्मेंस दिया जाए, समझ में नहीं आता।
अरुणिमा
सेवा सदफ
अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने वाली पूर्व छात्राएं हैं कई
}फुटबाॅल:मधु कुमारी 06 इंटरनेशनल 2006-07
}इंडोर क्रिकेट: अनुप्रिया श्रीलंका 2004
} इंडोर क्रिकेट: अर्चना साउथ अफ्रीका 2005
}थ्रो बॉल: रागिनी कुमारी श्रीलंका 2010
}थ्रो बॉल: जिज्ञासा श्रीलंका 2007
मगध महिला कॉलेज की प्रभारी प्राचार्या डॉ. जयश्री मिश्रा से सीधी बात
जगहकी कमी के कारण समस्या रही
मैदान छोटा होने से खेलकूद के आयोजन में क्या समस्या नहीं होती?
मैदानहै ही नहीं। यह एक बड़े आंगन की तरह हो गया है। खेलकूद का आयोजन निश्चय ही इससे बाधित हो रहा है। हमलोग को उम्मीद थी कि कॉलेज को नए ब्लॉक के निर्माण के लिए नई जमीन मिलेगी। 1996 में स्वर्ण जयंती के अवसर पर घोषणा भी हुई, लेकिन मंत्री जी का हस्ताक्षर होते होते रह गया।
शिक्षकोंकी संख्या आधे से भी कम हो गई है?
फैकल्टीकी कमी से समस्या होती है, वर्कलोड बढ़ गया है लेकिन एडहॉक टीचर की मदद से काम चलाया जा रहा है।
क्लासरूम की भी कमी है?
परेशानीतो होती है। नए भवन के निर्माण की जरूरत है, लेकिन जगह की कमी के कारण समस्या रही है।
शिखा कुमारी
शानू राज