- Hindi News
- राज्यपाल ने स्पीकर से पूछा क्यों और कैसे दी नीतीश को नेता के रूप में मान्यता
राज्यपाल ने स्पीकर से पूछा- क्यों और कैसे दी नीतीश को नेता के रूप में मान्यता
िसयासी शतरंज
सरकार पर फैसला सुरक्षित
{मांझी ने राज्यपाल से कहा- विधानसभा में गुप्त मतदान हो।
{वोटों की गिनती के समय दोनों पक्ष के 1-1 पर्यवेक्षक रहें।
{नीतीश को नेता चुना जाना अवैध। वे तो विधानसभा के सदस्य भी नहीं हैं।
{विधायक राजीव रंजन, नरेंद्र सिंह के विधायक बेटे अभय प्रताप सुमित सिंह भी पार्टी से बाहर।
{नीतीश बोले-राज्यपाल ने 48 घंटे में फैसला नहीं लिया तो राष्ट्रपति के सामने कराएंगे परेड।
मांझी भी राज्यपाल से मिले, कहा- हमारे पास बहुमत, 19, 20 या 23 फरवरी को जब कहें, साबितकर दूंगा
130 विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे नीतीश, राज्यपाल को समर्थन का पत्र सौंपा, जदयूने मांझी को निकाला
जदयूमें पिछले चार दिन से जारी सत्ता संग्राम सोमवार की सुबह राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के पटना पहुंचते ही और तीखा हो गया। दिनभर राजभवन सियासी दावे-प्रतिदावे का केंद्र बना रहा। राज्यपाल ने नीतीश और मांझी दोनों कैंप की सुनी, लेकिन कोई फैसला नहीं सुनाया। वे शाम सात बजे राज्यपालों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली रवाना हो गए।
राज्यपालने दिया भरोसा जल्द फैसला लेंगे
सम्मेलन10 से 12 फरवरी तक है। इस दौरान गवर्नर वहीं रहेंगे। हालांकि उन्होंने शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। नीतीश ने राज्यपाल से मुलाकात कर जहां 130 विधायकों के समर्थन का दावा किया, वहीं मांझी ने भी ताल ठोकी। कहा-बहुमत मेरे पास जब कहेंगे, साबित कर दूंगा। हालांकि जदयू ने उनपर अपना ब्रह्मास्त्र चला दिया। पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने मांझी को पार्टी से बाहर कर दिया। महासचिव के.सी. त्यागी ने कहा कि मांझी भाजपा के इशारे पर काम कर रहे थे।
नीतीश, शरद, लालू प्रसाद और कांग्रेस नेता सदानंद सिंह के साथ राज्यपाल से मिले। कहा- 130 विधायक परिचय पत्र के साथ आए हैं, जिनकी हम परेड करा सकते हैं। पर राज्यपाल ने कहा-अभी जरूरत नहीं है। बाद में नीतीश बोले-अगर वे 24-48 घंटे में संविधान सम्मत कार्रवाई नहीं करते हैं तो विधायक राष्ट्रपति के समक्ष परेड करेंगे। राजद, कांग्रेस भाकपा के भी विधायकों ने राजभवन मार्च किया।
नीतीश के निकलते ही मुख्यमंत्री मांझी राज्यपाल से मिलने पहुंंचे। बहुमत होने का दावा किया। उन्होंने 19, 20 या 23 फरवरी को बहुमत साबित करने का मौका देने का अनुरोध किया। सदन में गुप्त मतदान की आवश्यकता जताई। वोटों की गिनती के समय दोनों पक्ष से एक-एक पर्यवेक्षक रखने मांग भी की।
शेषपेज|10 पर
सरकारपर फैसला...
राज्यपालसे मिलने के बाद उन्होंने बताया कि नीतीश के पास बाहुबलियों की कमी नहीं है। इसी वजह से मेरे साथ के बहुत से विधायक अभी सामने नहीं आना चाहते। अब यह राज्यपाल के ऊपर है कि वे मुझे कब मौका देना चाहते हैं। नीतीश का विधानमंडल दल के नेता के रूप में चयन अवैध है। मैंने राज्यपाल को बताया है कि मैं बहुमत साबित करने से भाग नहीं रहा हूं। जब मौका मिलेगा बहुमत साबित कर दूंगा।
चार बागियों के मामले में डबल बेंच में है रोक : स्पीकर
स्पीकर ने कहा-हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू सहित चार अन्य के मामले में सदस्यता बहाल करने संबंधी फैसले पर डबल बेंच ने रोक लगा रखी है और सुनवाई कर फैसला सुरक्षित कर रखा है। कोर्ट का फैसला आने पर वह उसका कार्यान्वयन कैसे रोक सकते हैं। विधानसभा ने ही एकल पीठ के फैसले के खिलाफ अपील की है।
बहुमत के फैसले के लिए गोपनीय मतदान क्या पहले भी हुआ है
विस में 1968 में तत्कालीन सीएम महामाया प्रसाद सिन्हा के खिलाफ बीपी मंडल ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। तत्कालीन विस अध्यक्ष धनिकलाल मंडल ने प्रस्ताव पर गोपनीय मतदान कराया था। सरकार गिर गई थी। मांझी ने गोपनीय मतदान से बहुमत का फैसला कराने की स्पीकर से मांग की है।
पढ़िए पेज- 2, 4, 15 16
मांझी क्या करेंगे : 27सदस्य जुटाने की कोशिश। भाजपा के 87 और तीन निर्दलीय साथ हैं। स्पीकर को हटाने के लिए संकल्प लाने की तैयारी है। सभा सचिव को संकल्प दिए जाने पर 14वें दिन इसपर विचार होगा। उस दिन 38 सदस्य पक्ष में होना जरूरी है। बहुमत का जुगाड़ होने पर स्पीकर हटाए जा सकते हैं। पर इसके पहले उन्हें खुद का बहुमत दिखाना होगा।
राजद में टूट संभव : 8-9विधायक बगावत कर सकते हैं। राघवेन्द्र सिंह ने कहा- हमने विधायक दल की बैठक में मांझी को हटाने पर सवाल उठाया है। सदस्यता गंवा कर भी हम सदन में मांझी का साथ देंगे।
नीतीश खेमा : 130विधायकों की एकजुटता बरकरार रखने की कोशिश। राष्ट्रपति के समक्ष इनकी परेड करा सकते हैं। मंजित सिंह ने कहा कि दो दिन में प्लेन से सभी दिल्ली जाएंगे।
भाजपा : मांझीयदि बहुमत साबित करने के लिए जरूरी 27 विधायक जुटा लेंगे तो ही भाजपा साथ देगी। नीतीश को अवसर मिलेगा तो विरोध करेंगे। केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी बोले-राज्यपाल के निर्णय के बाद पत्ते खोलेंगे।
राज्यपाल : तीनदिन दिल्ली में रहेंगे। विधि विशेषज्ञों से सलाह लेंगे। वे चाहें तो 20 को अभिभाषण के बाद ही मांझी को सदन में बहुमत साबित करने को कह सकते हैं। नीतीश की मांग के अनुरूप वे 20 के पहले भी सदन की बैठक बुलाने का मांझी को निर्देश दे सकते हैं।
स्पीकर ने मांझी को असंबद्ध किया
स्पीकरउदय नारायण चौधरी ने सोमवार को मांझी को जदयू से निष्कासित किए जाने के बाद असंबद्ध सदस्य घोषित कर दिया। अब सदन में सीएम के बैठने का स्थान तो नहीं बदलेगा, लेकिन जदयू सदस्य सत्ता पक्ष में कैसे बैठेंगे यह देखना रोचक होगा। मांझी इंदिरा गांधी का इतिहास दुहराएंगे। 1969 में पार्टी से निष्कासन के बाद इंदिरा पीएम बनीं रही थीं।
राज्यपाल के सामने संवैधानिक उलझन
संविधानके अनुच्छेद 176 के अनुसार नए चुनाव के बाद विस की पहली बैठक और नए वर्ष के पहले सत्र की पहली बैठक की शुरुआत राज्यपाल के ही अभिभाषण से होनी है। ऐसे में अभिभाषण के पहले मांझी सरकार को बहुमत साबित करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण देना होता है। मांझी कैबिनेट इसे स्वीकृति भी दे चुकी है।
सुबह 09:30 बजे | राज्यपालकेशरीनाथ त्रिपाठी कोलकाता से पटना पहुंचे।
10:00बजे | जदयूके राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने जीतन राम मांझी को पार्टी से निकाला।
10:30बजे | नीतीशके आवास पर आने लगे विधायक।
12:30बजे | मुख्यमंत्रीदिल्ली से पटना पहुंचे। एयरपोर्ट से सीधे राजभवन गए। मुख्य सूचना आयुक्त के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की।
1:08बजे | मुख्यमंत्री1, अणे मार्ग के लिए निकले।
1:35बजे | नीतीशसमर्थक विधायकों का राजभवन मार्च।
1:40बजे | शरद,लालू, नीतीश, सदानंद, सिद्दीकी वाहन से राजभवन पहुंचे।
2:40बजे | राज्यपालसे वार्ता बाद सभी राजभवन से निकले।
3:05बजे | राज्यपालमिलने मांझी पहुंचे। साथ में मंत्री, नीतीश मिश्रा, विनय बिहारी, भीम सिंह, सम्राट चौधरी भी थे।
3:45बजे | मुख्यमंत्रीबाहर निकले। मीडिया से बात की।
7:00बजे | श्रवणके आवास पर जदयू और सहयोगी नेताओं के लिए भोज।
उदय नारायण
केशरीनाथ त्रिपाठी
राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने सोमवार को स्पीकर उदय नारायण चौधरी से पूछा कि क्यों और कैसे नीतीश को नेता के रूप में मान्यता दी? क्योंकि, सीएम मांझी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर शरद द्वारा बुलाई गई विधानमंडल दल की बैठक को अनधिकृत करार दिया था। चौधरी ने कहा-नियम और परंपरा के तहत निर्णय लिया है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह का मुझे 7 फरवरी को पत्र मिला। उसी दिन मांझी के स्थान पर नीतीश को सर्वसम्मति से नेता चुने जाने की हमें सूचना मिली। पहले भी ऐसा हुआ है। अश्वनी चौबे को पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष गोपाल नारायण सिंह के पत्र के आधार पर भाजपा विधानमंडल दल के नेता के रूप मेें मान्यता दी गई थी। इस बीच, सोमवार को परिषद के सभापति ने नीतीश को नेता के रूप में मान्यता दे दी है।