फंड के बावजूद तीन साल बाद काम शुरू
बिहटाप्रखंडके कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय भवन के लिए फंड उपलब्ध होने के बावजूद तीन साल तक काम नहीं किया गया। तीन साल बाद बीते जनवरी में काम शुरू होने के बावजूद अब तक काम पूरा नहीं हो पाया है। विद्यालय के लिए करीब 46 लाख रुपए का फंड जारी किया गया था। भवन नहीं बनने की वजह से संकुल संसाधन के एक कमरे में पूरा आवासीय विद्यालय चलाया जा रहा है। कमरे नहीं होने की वजह से विद्यालय में कुल संख्या से करीब आधा ही छात्राओं को नामांकित किया जा सका है। डीबी स्टार ने पड़ताल की तो छात्राओं की कई तरीके की परेशानियां सामने आईं। पड़ताल के क्रम में सामने आया कि संकुल में मौजूद तीन-चार कमरों में एक आवासीय विद्यालय के लिए दे दिया गया है। संकुल में अक्सर बैठक आदि होते रहने की वजह से भी छात्राओं को खूब परेशानी उठानी पड़ती है।
छात्राओंकी संख्या आधी
ग्रामीणइलाके में गरीबी के कारण शिक्षा के मुख्य धारा से वंचित बच्चियों को जोड़ने के लिए सरकार द्वारा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की शुरुआत की गयी थी, लेकिन अपना भवन नहीं होने की वजह से प्रखण्ड में केवल 53 छात्राओं को ही एडमिशन दिया जा सका है।
नियम के मुताबिक विद्यालय में करीब 100 छात्राओं को एडमिशन दिया जाना होता है। एक कमरे में विद्यालय चलने की वजह से नियम होने के बावजूद तो छात्राओं को कम्प्यूटर मुहैया कराया जा सका, ही व्यवसायिक शिक्षा दी जा रही है। मतलब साफ है कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की मूल अवधारणा का ही सही तरीके से पालन नहीं हो पा रहा है। विद्यालय में छात्राओं के देखरेख के लिए एक वार्डन और एक सहायिका मौजूद है। खाना बनाने के लिए दो सेविकाओं को लगाया गया है। छात्राओं की सुरक्षा के लिए एक नाइट गार्ड रखा गया है।
संकुल संसाधन केन्द्र में चल रहे बिहटा के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में कुछ इस तरह होता है होमवर्क (ऊपर) और यूं बैठकर खाती हैं छात्राएं (नीचे)।
53 छात्राओं के लिए महज 17 बेड
विद्यालय में निर्धारित संख्या से कम छात्राएं होने के बावजूद उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। बेड की संख्या केवल 17 होने की वजह से कई बेड़ों पर तीन-तीन छात्राओं को सोना पड़ता है। ठंड में कंबल आदि की संख्या कम होने की वजह से छात्राओं की परेशानी काफी बढ़ गई है। बीआरसी में विद्यालय होने के बावजूद अधिकारियों ने अब तक छात्राओं