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29 ट्रेनेंहर दिन पटना स्टेशन से खुलती हैं

7 वर्ष पहले
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सालभरपहले रेल मंत्रालय ने चलती ट्रेन में यात्रियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू करने की घोषणा की थी। इसका अनुपालन अब तक कम ही ट्रेनों में हुआ है। राजधानी से हर दिन आने-जाने वाले हजारों रेल यात्रियों को इससे बड़ी फजीहत झेलनी पड़ती है। किसी भी परेशानी में यात्री सिर्फ भगवान भरोसे ही रहते हैं। डीबी स्टार टीम ने पटना स्टेशन से जाने वाली ट्रेनों की पड़ताल की। इसमें पटना से गया और मुगलसराय की ओर, साथ ही झाझा, भागलपुर और बंगाल जाने वाली ट्रेनों की स्थिति लगभग एक जैसी ही दिखी।

खूबलगे हैं प्राइवेट पोस्टर

ट्रेनोंमें अब तक जरूरत के नंबर तो नहीं लगाए गए हैं, लेकिन बोगियों में प्राइवेट पोस्टर खूब चस्पा हैं। यहां चिपकाए गए पोस्टर मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब, भारत के साथ विदेश तक नौकरी देने का दावा, घर बैठे सात घंटे में चमत्कार दिखाना, फाइव स्टार होटलों में नौकरी, प्राइवेट अस्पतालों का विज्ञापन और कोचिंग सेंटर का प्रचार कर रहे हैं। इन पोस्टरों में बाकायदा लोगों ने अपने निजी नंबर भी दे रखे हैं। सवाल यह भी है कि ये पोस्टर किसकी अनुमति से चिपकाए जा रहे हैं और अनुमति नहीं तो कार्रवाई क्यों नहीं।

पैसेंजर ट्रेनों में ज्यादा परेशानी

लंबी दूरी और बड़ी ट्रेनों में सीधे तौर पर पुलिस वालों की तैनाती की जाती है, लेकिन डेली लाइफ लाइन कही जाने वाली पैसेंजर ट्रेनों के साथ कम दूरी की ट्रेनें आज भी भगवान भरोसे ही हैं। डीबी स्टार ने पटना से गया, मुगलसराय और पटना से झाझा जाने वाली ट्रेनों के अलावा कई एक्सप्रेस ट्रेनों की बोगियों में जाकर देखा। कहीं भी आज तक रेलवे पुलिस के नंबर चस्पा नहीं किए गए हैं। यात्री बताते हैं कि पैसेंजर ट्रेनों से सफर करना बहुत कठिन है। चेन पुलिंग से लेकर चोरी और छेड़छाड़ जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अब ऐसे में अगर किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो लोग रेलवे को फोन नहीं कर सकते।

जीआरपी सुरक्षा को लेकर पर्याप्त गंभीर नहीं

यात्रियों की सुरक्षा के लिए जीआरपी गंभीर नहीं है। पुलिस द्वारा कंट्रोल रूम और सहायता नंबरों के बारे में स्टेशन पर भी जानकारी नहीं दिए गए हैं। यात्री बताते हैं कि विषम हालात में उनके पास संपर्क करने की कोई व्यवस्था नहीं होती है।

लोगों को भटकना नहीं पड़े, इसलिए बना नियम

रेलवेयात्रियों की परेशानी कम करने के लिए इस नियम को जारी कि