देवांशु नारायण पटना
देवांशु नारायण > पटना
बिहारकीमहिलाओं को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर महीने अनाज दिया जाता है। अनाज में चावल, दाल के साथ पिछले कुछ महीनों से सोयाबीन भी दिया जा रहा है। लेकिन, पोषण के लिए सबसे जरूरी आयोडीन नमक का वितरण किसी केंद्र पर नहीं होता। समाज कल्याण विभाग बिहार की गर्भवती और प्रसूति महिलाओं को सिर्फ सूखा अनाज देता है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविकाओं से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि हर दिन बनने वाले खाने में आयोडीन नमक इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने सभी केंद्रों के लिए आठ-आठ गर्भवती और प्रसूति की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी है। आंगनबाड़ी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इन केंद्रों में आठ के बदले 17 से 18 गर्भवती और इतनी ही प्रसूति महिलाओं की देखभाल करनी पड़ती है।
रितेश
आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत
}एक फरवरी 2013 से खाद्य सुरक्षा कानून को लागू कर दिया गया है। इसे एक समान रूप से पूरे राज्य में लागू करने के लिए भी अतिरिक्त आंगनबाड़ी की जरूरत है।
}वर्तमान में बिहार में 0-6 वर्ष के बच्चों की संख्या एक करोड़ 86 लाख पहुंच गई है।
}91 हजार केंद्रों में कुल मिलकर सिर्फ 73 लाख 30 हजार बच्चे जुड़े हुए हैं।
}सभी बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए 41 हजार नए आंगनबाड़ी केंद्रों की जरूरत है।
बिहार की वर्तमान स्थिति
सिर्फ खाना बनाने में आयोडीन नमक
^हम महिलाओं को सिर्फ सूखा अनाज, चावल, दाल और सोयाबीन ही देते हैं। बिहार में खाना बनाते समय आयोडीन नमक का इस्तेमाल होता है। आगे अगर योजना बनेगी तो बांटा जाएगा।
नीलमगुप्ता,निदेशक, आईसीडीएस
बिहार में गर्भवती महिलाओं को नहीं देते आयोडीन नमक
}पूर्वी भिखाचक आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका कुंती देवी कहती हैं कि यहां हर दिन 40 बच्चों का खाना बनता है। साथ ही 12 प्रसूति और 11 गर्भवती महिलाओं की देखरेख करनी पड़ती है।
}डमरिया आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका रंजू देवी ने बताया कि उनके यहां 16 प्रसूति और 12 गर्भवती महिलाएं रजिस्टर्ड हैं। हर दिन 40 से 50 बच्चों का खाना बनाना पड़ता है। सेविकाओं के पास भी सुविधा की भारी कमी है, इसलिए देखभाल भी बहुत मुश्किल से हो पाता है।
}आशियाना नगर और एनटीपीसी के बीच बने आंगनबाड़ी केंद्र की हालत बेहद जर्जर है। यहां आठ प्रसूति और आठ गर्भवती महिलाएं हैं और बच्चे लगभग 60 हैं। सेविका क