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एनजीओ ने काम अधूरा छोड़ा शौचालय के 1.66 करोड़ दबाए

7 वर्ष पहले
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गरीबोंऔरकमजोर वर्ग के लोगों के घर में शुष्क शौचालय की जगह जलवाही शौचालय और नए शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी का मामला इंटरनेशनल ह्यूमन राइट एसोसिएशन की ओर से दायर एक जनहित याचिका के कारण सामने आया। वर्ष 2008 में केंद्र सरकार से आई राशि से यह काम किया जाना था। जनहित याचिका दायर करने वाले वकील एस अलमदार हुसैन और शशिभूषण कुमार ने निर्मित शौचालयों की घटिया क्वालिटी, काम को बीच में रोकने और काम के लिए मिली राशि के बंदरबांट का मामला उठाया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रेखा एम दोशित तथा न्यायमूर्ति बीरेंद्र प्रसाद वर्मा की खंडपीठ ने सामाजिक संस्था इंटरनेशनल ह्यूमन राइट एसोसिएशन की याचिका पर कई बार सुनवाई के बाद पटना के एडीएम तथा अन्य की कमेटी से शौचालयों के निर्माण की जांच कराई।

कार्रवाईके लिए गईं दो चिटि्ठयां फाइल में

जांचके बाद पटना के डीएम ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि दानापुर, फुलवारीशरीफ, खगौल और मनेर के इलाके के कुल 9808 शौचालय बनाने थे। इसके लिए कुल आठ करोड़ 97 लाख 42 हजार दो सौ रुपए आवंटित किए गए थे। इनमें से केवल 3927 शौचालयों का निर्माण हुआ और वह भी अधूरा और घटिया। जहां-जहां शौचालय बनाए भी गए तो वह अधूरा ही रहा। शौचालयों में छत-दरवाजा आदि निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं बनाए गए। बेहद घटिया स्तर के शौचालयों के निर्माण के नाम पर पांच करोड़ 20 लाख 24 हजार रुपए खर्च कर दिए गए। डीएम ने नगर विकास सचिव को 08 नवंबर 2014 को भेजे अपने पत्र में शौचालय निर्माण में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया है। जब कार्रवाई की सूचना नहीं मिली तो उन्होंने 02 दिसंबर 2014 को जांच रिपोर्ट के साथ स्पष्ट करते हुए लिखा कि कहां-कहां कितनी राशि पड़ी है। इसमें उन्होंने शौचालय बनाने वाली एजेंसी (एनजीओ) के पास अब भी एक करोड़ 66 लाख 81 हजार 152 रुपए पड़े होने की जानकारी दी। साथ ही, निकायों के यहां तीन करोड़ 70 लाख 19 हजार 48 रुपए रखे होने की जानकारी भी इस चिट्‌ठी में दी गई।

अपने प्रदेश में

दूसरे राज्य में

2008 की केंद्रीय योजना से 9-9 हजार में बनने थे शौचालय

^सरकारी फंड के दुरुपयोग के साथ यह और भी दुखद है कि शौचालय बनाने में अपनी गाढ़ी कमाई से एक हजार रुपया जमा कराने वाले गरीब-पिछड़े लोग ठगे गए। गरीबों की उम्मीद पूरी नहीं हुई और एनजीओ निकायों की मिलीभगत से घाल