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रक्तवापसकरने के बाद प्रदेश के कई ब्लड बैंक डोनर कार्ड को वापस लेकर फाड़ देते हैं। इससे नियमित रूप से रक्तदान करने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। उनके पास अपने पर्सनल रिकार्ड के रूप में रखने के लिए कुछ नहीं बचता है। डीबी स्टार की पड़ताल में मालूम हुआ कि निम्न पदस्थ कर्मियों की जिद और नासमझी के कारण ऐसा हो रहा है। राज्य रक्ताधान परिषद का कोई भी प्रावधान ऐसा नहीं है कि मांगने पर किसी व्यक्ति को उसका डोनर कार्ड देने से रोका जाए।
कैंसिलकर वापस किया जा सकता है कार्ड
नियमितडोनरों की स्वभाविक अपेक्षा होती है कि उनके पास डोनेशन का रिकार्ड हो। जब वे रक्तदान करते हैं तो उन्हें एक रसीदनुमा कागज दिया जाता है। इसपर डोनेट किए गए ब्लड की यूनिट और तारीख अंकित होती है। इसे दिखाकर वे समान मात्रा में ब्लड अपने किसी परिजन या अन्य मरीज को दिलवा सकते हैं। लेकिन, जब वे किसी को रक्त दिलवाने के लिए ब्लड बैंक में जाते हैं तो खून देने वाले कर्मचारी इस डोनर कार्ड को रख लेते हैं। मांगने पर भी वापस नहीं करते, बल्कि फाड़ देते हैं। राज्य रक्ताधान परिषद के दिशानिर्देशों के अनुसार मांगने पर इन्हें कैंसिल कर डोनर को वापस कर दिया जाना चाहिए।
स्मार्ट कार्ड देने पर चल रहा विचार
बिहारराज्य एड्स नियंत्रण समिति (बीसैक्स) ने पूरे प्रदेश में ई-ब्लड बैंक बनाने की योजना बनाई है। इसके अंतर्गत हरेक नियमित, निशुल्क और स्वैच्छिक रक्तदाता को एक स्मार्ट डोनर कार्ड देने पर विचार चल रहा है। इस कार्ड पर डोनर और उसके पूरे परिवार का विवरण बायोमीट्रिक प्रणाली में अंकित रहेगा, ताकि पुख्ता पहचान हो सके। एक बार ब्लड देने पर एक खास अवधि के लिए यह कार्ड वैलिड होगा। इस अवधि में किसी को भी इस कार्ड के सहारे रक्त दिलवाया जा सकेगा। अवधि के समाप्त होने से पहले ही एक यूनिट रक्त देकर इसे फिर से रिचार्ज किया जा सकेगा। उड़ीसा में पहले से ही इस तरह की व्यवस्था है। हालांकि, सभी ब्लड बैंकों का कंप्यूटरीकरण नहीं होने के कारण वहां योजना बहुत सफल नहीं हो पाई है। इससे सबक लेते हुए राज्य रक्ताधान परिषद यहां सबसे पहले ब्लड बैंक को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत और स्टॉक को ऑनलाइन करने का काम कर रही है। रक्त सुरक्षा समिति उड़ीसा जाकर वहां की व्यवस्था भी देखेगी। भारत सरकार भी ई-ब्लड बैंकिंग को बढ़ावा देने की पक्षधर है। इस संबंध