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10 हजार से अधिक पुस्तकों का डिजिटलाइजेेशन
बिहारहितैषी पुस्तकालय हिंदी साहित्य का प्रमुख केंद्र है। यहां 44 हजार से अधिक किताबें हैं। संरक्षित सुरक्षित करने के लिए डिजिटलाइज्ड किया जा रहा है। प्रथम चरण में 10 हजार पुस्तकों को डिजिटलाइज्ड किया जा चुका है। बिहार हितैषी पुस्तकालय 132 वर्ष पुराना है। यहां साहित्य का अनमोल खजाना पाठकों को मिलता है। कुछ वर्ष तक विरान हो चुके पुस्तकालय में हाल के दिनों में फिर से रौनक लौटी है। प्रतिदिन करीब दो सौ की संख्या में पाठक आते हैं। नई पुस्तकों की खरीदारी पुराने पुस्तकों को संरक्षित किया जा रहा है। नए पाठकों को जोड़ने के लिए प्रतियोगिता संबंधित पत्रिकाओं को भी शामिल किया गया है।
खास क्या
सरस्वती, चंदामामा, बाल हंस, नवनीत, कादंबिनी, नंदन, पराग, चंपक सहित दशकों पुरानी पत्रिकाएं यहां संरक्षित सुरक्षित रखी गई हैं। देश के कई भाग से लोग इस पुस्तकालय में पहुंचते हैं। लेकिन आज तक इसे केंद्रीय पुस्तकालय का दर्जा प्राप्त नहीं हो सका है। पाठक काफी दिनों से इसे केंद्रीय पुस्तकालय घोषित करने की मांग करते रहे हैं। मात्र दो कर्मचारियों के बूते ही पुस्तकालय चल रहा है। हाल के दिनों में कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाने के बाद लोगों का रुझान इस ओर बढ़ा है। खास कर युवाओं का।
पुस्तकालय में 44 हजार किताबें हैं। इसके अलावा कई कलाकृतियां भी यहां उपलब्ध हैं। समुचित संसाधन की कमी बनी रहती है। पुस्तकालय के सचिव महेन्द्र अरोड़ा ने बताया कि पिछले कई माह से पुस्तकों को डिजिटलाइज्ड किया जा रहा है। दस हजार से अधिक पुस्तकों का काम पूरा हो चुका है,अन्य पुस्तकों पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार से जो भी आर्थिक सहयोग मिलता है उसे क्रम विकास कार्य कराएं जा रहे हैं।