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वर्तमान समय में सबसे बड़ी समस्या चरित्र संकट का
पटना|आध्यात्मिक सत्संगसमिति के तत्वावधान में सोमवार को नागाबाबा ठाकुरबाड़ी में सात दिवसीय प्रवचन आरंभ हुआ। इसका उद्घाटन पद्मश्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने किया। आनन्द सुब्रह्मण्यम शास्त्री ने कहा कि प्रारंभ तथा अन्त दोनों की उत्पत्ति धर्म शब्द से हुई है।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन में दो बार गुरु के पास जाना पड़ता है, प्रथम ब्रह्मचर्य आश्रम में धर्म ज्ञान के लिए दूसरा संन्यास आश्रम में ब्रह्मासन के लिए। उन्होंने कहा कि जीवन में धन शांति प्राप्त होते ही ब्रह्मज्ञान की संभावना बनती है। प्रवचन देते हुए कहा कि शांति में ही धर्म की प्राप्ति होती है।
संचालक रामनरेश गुप्त, अध्यक्ष विजय कुमार किशोरपुरिया, पुष्कर लाल अग्रवाल, निर्मल कुमार झुनझुनवाला, प्रो रामपाल अग्रवाल, बिनोद खेता, गोपाल कृष्ण झुनझुनवाला आदि लोगो शामिल थे।
प्रवचन देते सुब्रह्मण्यम शास्त्री।