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नॉन बैंकिंग कंपनियों पर जिला प्रशासन की नजर

7 वर्ष पहले
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नॉन बैंकिंग कंपनियों द्वारा किए जा रहे अवैध काराेबार पर अब रोक लगाई जाएगी। जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक ऐसे मामलों के आने के साथ ही त्वरित कार्रवाई करेंगे। आम आदमी ठगी का शिकार हो, इसके लिए अब प्रशासन नॉन बैंकिंग कंपनियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखेगा। प्रमंडलीय आयुक्त डॉ. एन विजया लक्ष्मी की अध्यक्षता में सभी जिलाधिकारियों पुलिस अधीक्षकों की बैठक में रेगुलेटिंग एजेंसियों की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया।

राज्य सरकार के सांस्थिक वित्त विभाग के निर्देश पर कार्यशाला में भारतीय रिजर्व बैंक के सहायक महाप्रबंधक आनंद, सेबी के महाप्रबंधक राकेश कुमार सपना सिन्हा और पटना के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज यूएस पटोले ने नॉन बैंकिंग कंपनियों के संचालन के लिए निर्धारित नियमों की जानकारी दी। उन्होंने नॉन बैंकिंग कंपनियों को चलाने के लिए जरूरी प्रावधानों, पात्रता शर्तों के बारे में भी जिला स्तरीय पदाधिकारियों को जानकारी दी। आरबीआई सेबी के प्रतिनिधियों ने कहा कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों में नॉन बैंकिंग कंपनियां लोगों के बीच जाल फैलाकर उनकी गाढ़ी कमाई को हड़पने का प्रयास करती हैं। ऐसी कंपनियों को चिह्नित कर प्रशासन कार्रवाई के दायरे में लाए।

प्रमंडलीय आयुक्त ने कहा कि निवेशकों के हितों की रक्षा जरूरी है। इसके लिए सभी पदाधिकारियों को काम करना होगा। सभी जिलों में एक वरीय उपसमाहर्ता को बैंकिंग गतिविधियों के लिए नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। कार्यशाला में पटना के डीआईजी अजिताभ कुमार शाहाबाद के डीआईजी उमाशंकर सुधांशु के अलावा पटना डीएम मनीष कुमार वर्मा, नालंदा डीएम वी. कार्तिकेय, रोहतास डीएम आरके झा, बक्सर डीएम रमण कुमार और कैमूर के डीएम प्रभाकर झा, पटना के एसएसपी मनु महाराज, ट्रैफिक एसपी पीके दास, ग्रामीण एसपी हरि किशोर राय, नालंदा के एसपी सिद्धार्थ मोहन जैन, बक्सर के एसपी जयंत कांत, रोहतास के एसपी चंदन कुशवाहा, कैमूर के एसपी पुष्कर आनन्द भोजपुर के एएसपी दीपक रंजन मौजूद थे।