पटना विवि बचाओ संघर्ष मोर्चा बनेगा
पटना विश्वविद्यालय की पहचान को बरकरार रखने के लिए जोरदार संघर्ष होगा। किसी भी स्थिति में मगध विश्वविद्यालय के कॉलेजों को पटना विवि में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। शनिवार को पटना कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. नवल किशाेर चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सबने एक सुर में यह संकल्प जताया। मगध विवि के पटना क्षेत्र के 20 कॉलेजों काे पटना विवि में शामिल करने का सुझाव शिक्षा विभाग को दिया गया है। इसके खिलाफ पटना विवि के शिक्षक, कर्मचारियों छात्र संगठनों ने एक मंच पर आकर जोरदार विरोध करने का निर्णय लिया।
पटना कॉलेज में हुई बैठक में ‘पटना विवि बचाओ संघर्ष माेर्चा’ के गठन का निर्णय लिया गया। मोर्चा की औपचारिक घोषणा दुर्गापूजा की छुटिट्यों के बाद की जाएगी। बैठक में पूटा चुनाव लड़ रहे लगभग सभी शिक्षक नेताओं ने हाजिरी लगाई। एनके पांडेय ग्रुप, एनके झा ग्रुप रोहित रमण ने बैठक में पहुंच कर अपने पक्ष में वोट भी मांगे और पटना विवि के वर्तमान स्वरूप से छेड़छाड़ का कड़े शब्दों में विरोध किया। शिक्षकों ने साफ कहा कि शिक्षा मंत्री से शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल मिलेगा। पटना को वर्तमान स्वरूप में बरकरार रखने और इसे केंद्रीय विवि का दर्जा दिलाने की मांग करेगा। कर्मचारी संगठन के उमेश कुमार और छात्र प्रतिनिधियों ने भी पटना विवि को बरकरार रखने के लिए किसी भी आंदोलन का हिस्सा बनने पर अपनी सहमति जताई। बैठक में प्रस्ताव पास किया गया कि पटना विवि के किसी भी विस्तार कार्यक्रम का विरोध किया जाएगा। सबने एक सुर में सरकार से पटना4 के तहत चलने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज मेडिकल कॉलेज को फिर से शुरू करने, विवि कैंपस में डेमोक्रेटिक माहौल तैयार करने अौर छात्र-शिक्षकों कर्मचारियों को बेहतर माहौल देने का प्रस्ताव शिक्षकों ने पास किया। बैठक में बड़ी संख्या में अन्य शिक्षक छात्र मौजूद थे।
पटना कॉलेज के प्राचार्य मगध विवि के कॉलेजों को पटना विवि में शामिल किए जाने के विरोध का नेतृत्व करने वाले डाॅ. एनके चौधरी का कहना है कि पटना विवि को ही विकसित करने का प्रयास क्यों नहीं हो रहा है। पटना विवि की विशाल सांस्कृतिक विरासत है। इसे कैंपस यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त है। इसका फलक विस्तारित होने से अपनी वास्तविक छवि खो देगा। प्राचार्य ने कहा कि राज्य अपनी प्राचीन विरासत नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार कर रह