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सभी डॉक्टरों को जानना चाहिए ऑक्सीजन थेरेपी
फेफड़े की बीमारी से पीड़ित मरीज के लिए शरीर के अंदर ऑक्सीजन कम होना खतरनाक है। वहीं ऑक्सीजन का अधिक होना उससे भी अधिक नुकसानदेह है। इसलिए ऑक्सीजन थेरेपी की समझ सभी चिकित्सकों को होनी चाहिए। फेफड़ा के गंभीर मरीज को सांस की बीमारियों में सबसे पहले चिकित्सकों को कार्बनडाईऑक्साइड का लेवल मापना चाहिए। इसके बाद ऑक्सीजन चढ़ाना चाहिए। ऐसा नहीं करना मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
कई बार चिकित्सक मरीजों को ऑक्सीजन घर पर ही लगाने का सलाह दे देते हैं। इन परिस्थितियों में लगातार किसी मरीज को ऑक्सीजन देने पर उसके फेफड़े स्थाई तौर पर सिकुड़ सकते हैं। यह कहना है कोलकाता के डॉ. राजा धर का। वे इंडियन चेस्ट सोसाइटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मश्री डॉ. एसएन आर्या, डॉ. संजय कुमार, डॉ. सुधीर, डॉ. बी मृणाल झा ने संयुक्त रूप से किया। स्टेट कोआॅर्डिनेटर डॉ. संजय कुमार ने कहा कि आईसीयू में बेहतर मशीन के साथ-साथ प्रशिक्षित लोगों का होना जरूरी है।
कोर्स डाइरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस वेंटिलेटर ने गंभीर मरीजों का जीवन आसान करने का काम किया है। आधुनिक वेंटिलेटर का आकार छोटा होने के कारण अब उसका इस्तेमाल जनरल वार्ड और घर में भी होने लगा है। इसका फायदा यह है कि इसका इस्तेमाल मास्क के सहारे किया जाता है। इसके अलावा गले में डाले जाने वाले पाइप से मुक्ति मिल जाती है। डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि फेफड़ा रोगियों को हृदय गति की बीमारी से पीड़ित होने की आशंका बनी रहती है।