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अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब गया है...

7 वर्ष पहले
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अरेद्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब गया है...। भगवान श्रीकृष्ण से मिलने जब सुदामा द्वारका पहुंचे तो द्वारपालों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। लेकिन, जब यह सूचना श्रीकृष्ण को मिली तो वे दौड़े आए और फटेहाल सुदामा को गले लगा लिया। फिर अपने बचपन के मित्र सुदामा के पैर भी धोए। सुदामा ने अपनी फटी धोती की गठरी में लाए चावल को श्रीकृष्ण को दिया। भगवान ने उसमें से एक मुट्‌ठी चावल लेकर खा लिया। इससे एक लोक की मुक्ति हो गई। तब दूसरा मुट्‌ठी चावल भी खाया, तो दो लोक की मुक्ति हो गई। जब उन्होंने तीसरी मुट्‌ठी चावल खानी चाही, तो रुक्मिणी ने रोक दिया। कहा, महाराज यह क्या कर रहे हैं, आपने तो दो लोक सुदामा को दे दिया। इसके बाद भावुक होकर श्रीकृष्ण सुदामा के चरणाें में गिर कर रोने लगे।

रविवार को एग्जीविशन रोड के पुष्प विहार अपार्टमेंट में श्रीमद्‌भागवत कथा के अंतिम दिन श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग सुन श्रोता भावुक हो उठे। वृंदावन से आए स्वामी ताराचंद जी महाराज ने इससे पहले सातों दिन के कथा का सार भी सुनाया। उन्हाेंने कहा कि श्रीकृष्ण-सुदामा की दोस्ती आज भी मिशाल है। श्रीकृष्ण ने जिस तरह से अपने गरीब मित्र का स्वागत किया और उन्हें दो लोकों का स्वामी बना दिया, वैसा उदाहरण कहीं और नहीं मिलता।

कथा से पहले भगवत पूजन और शुकदेव पूजन हुआ। फिर आरती। इस मौके पर मुख्य यजमान राजीव झुनझुनवाला, अरुण झुनझुनवाला, अरुण केडिया, सुरेश अरोड़ा, गोपाल झुनझुनवाला, विकास झुनझुनवाला आदि उपस्थित थे।

कथा सुनाते स्वामी ताराचंद जी महाराज।