दयानंद सरस्वती की राह पर चलें
आजमनुष्य के व्यवहार में हर प्रकार की बुराइयों ने जड़े जमा रखी हैं। उनका चारित्रिक और संस्कार का पतन हो गया है। मानव के नवनिर्माण की योजना है संस्कार और संस्कार का अर्थ है किसी भी वस्तु के स्वरूप को बदल कर नया रूप देना।
ये बातें फ्रेजर रोड स्थित यूथ हॉस्टल में स्वामी दयानंद सरस्वती की 111वीं जयंती पर पवनसुत सर्वांगीण विकास केंद्र के सचिव डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने कही। उन्होंने कहा कि आर्य धर्म में भी 16 संस्कारों का जिक्र है। इन्हीं 16 संस्कारों के माध्यम से भगवान राम और कृष्ण जैसे महामानव का जन्म हुआ था। उन्होंने दयानंद सरस्वती के बारे में कहा कि उनके हृदय में उच्च भावना, यथार्थवादी मार्ग अपनाने की सहज प्रवृत्ति, मातृभूमि की नीयती को नई दिशा देने का अदम्य उत्साह था। किसी के विरोध तथा निंदा करने की परवाह किए बिना आर्यावर्त के हिंदू समाज का कायाकल्प करना अपना ध्येय बना लिया था। संजय मिश्रा ने कहा कि दयानंद सरस्वती ने शिक्षा को जोड़ दिया था, उन्होंने लोगों को वेद में बताए हुए चीजों को अपने जीवन में उतारने की और मातृभूमि से प्रेम करने की शिक्षा दी थी। कार्यक्रम में भारतीय जन क्रांति दल के प्रदेश अध्यक्ष अविनाश कुमार, उपाध्यक्ष डॉ. राजकिशोर सिंह, अर्पणा मिश्र, रीता सिंह, शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष कौशलेंद्र शर्मा, पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संजीव कुमार, धीरज कुमार, लक्ष्मण पांडेय, मनोज कुमार, श्वेता कुमारी, माया सिंह, सच्चिदानंद पांडेय आदि उपस्थित थे।