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तारीख बदलने की सलाह कैबिनेट ने नहीं दी थी
राजभवनने स्पष्ट कर दिया है कि विधान मंडल सत्र की निर्धारित तिथि को बदलना सही नहीं होता। सत्र प्रारंभ करने की तिथि 20 फरवरी निर्धारित है। 20 जनवरी की कैबिनेट की बैठक में ही यह तिथि निर्धारित की गई थी। कैबिनेट की ओर से इसमें परिवर्तन का कोई सलाह भी नहीं आया। ऐसे में इस तिथि में परिवर्तन करना सही नहीं है। शरद यादव और नीतीश कुमार के पत्र एवं मौखिक निवेदन से राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी को यह स्पष्ट हुआ कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के स्थान पर जदयू विधानमंडल दल ने मांझी को विधानमंडल दल के नेता पद से हटाकर नीतीश कुमार को अपना नेता चुन लिया है। मांझी से त्यागपत्र देने के लिए कहा गया, पर उन्होंने त्यागपत्र नहीं दिया।
अतः नीतीश कुमार को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए। दूसरी ओर, राज्यपाल को यह भी स्पष्ट हुआ है कि बिहार विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के अनुसार मुख्यमंत्री सदन का नेता होता है और मुख्यमंत्री ने अभी तक त्यागपत्र नहीं दिया है। इनके द्वारा सदन में बहुमत सिद्ध करने का दावा भी किया गया है। इस प्रकार सभी परिस्थितियों उपलब्ध पत्रों, टिप्पणियों, संविधान के प्रावधानों एवं सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘एस.आर. बोम्मई’ एवं ‘जगदंबिका पाल’ के प्रकरण में दिए गए निर्देशों पर गहनता से विचार करने के बाद राज्यपाल ने 20 फरवरी को विश्वासमत हासिल करने का निर्देश दिया है।