आतंकी संगठन से पुलिस अिधक मजबूत
रंगरूटों(ट्रेनी जवानों) को पुलिसिंग का पाठ पढ़ाते हुए डीजीपी पीके ठाकुर ने अहम गुर भी सिखाए। बीएमपी के हॉकी ग्राउंड में आयोजित ओपन क्लास में रंगरूटों से मुखातिब सूबे के पुलिस प्रमुख ने कहा कि किसी अपराधी गिरोह या उग्रवादी-आतंकवादी संगठन से हजारों गुना अधिक मजबूत पुलिस संगठन है। हमारे पास अत्याधुनिक हथियार, प्रशिक्षित बल, मनोबल से सुरक्षा उपकरण तक है। ऑपरेशन के दौरान ‘हथियार’ आपका (पुलिस) जीवन है। हथियार को दुरुस्त रखना आपकी जिम्मेवारी है। अगर कोई चुनौती मिलती है, तो सिर्फ इसलिए कि हम समूह के रूप में ऑपरेशन करने में विफल हो जाते हैं। अकेले चलने से तो आपका बचाव होगा और ही विजेता बनेंगे। समूह के रूप में ऑपरेशन की योजना बनती है। इसकी ब्रिफिंग को ध्यान से समझने अपनी भूमिका की पहचान करने के साथ मदद करना सीख लें। डीजी (ट्रेनिंग) पीएन राय, एडीजी (ट्रेनिंग) एसके भारद्वाज ने भी खास टिप्स दिए।
रंगरूट : ईमानदारीसे काम करते हैं, पर बड़े लोगों की पैरवी पर क्यों कार्रवाई करने से रोका जाता है?
डीजीपी: कभी-कभारऐसा होता है। कानून सबके लिए बराबर है। बिहार पुलिस ने कई बड़े लोगों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया है। अपराध के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
रंगरूट: ट्रेनिंगमें 10 दिन पहले ‘चुनाव में पुलिस की भूमिका’ पढ़ाई गई, पर पहले ही चुनावी ड्यूटी कराई गई। गड़बड़ी पर कौन जिम्मेवार होता?
डीजीपी: आमतौरपर ऐसा नहीं होता। आपकी ट्रेनिंग के हिसाब से ड्यूटी पर भेजा गया था।
रंगरूट:हमारे क्या कर्तव्य हैं?
डीजीपी:आपका कर्तव्य अपराध विधि-व्यवस्था नियंत्रण और लोगों में कानून के प्रति आस्था उत्पन्न करना है।
रंगरूट:हमारी एक भूल पर लोग जाम-उपद्रव क्यों करते हैं?
डीजीपी:जरूरी नहीं कि हर बार आपकी भूल पर लोग रिएक्ट करें। बेहतर काम से माहौल बदल सकता है।