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कैदियों ने सीखी जीने की कला

7 वर्ष पहले
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बेउरजेल के कैदियों ने मंगलवार को जीवन जीने की कला सीखी। कई कैदी हरे कृष्णा.. हरे रामा.. की धुन पर कृष्ण भक्ति में मगन हो नाचे भी।

मौका था इस्कॉन की ओर से आयोजित जेल कार्यक्रम का। दो घंटे तक चले इस आयोजन के दौरान कैदियों ने इस्कॉन के लोगों से सवाल भी पूछे। खास तौर से जेल से निकलने के बाद मौके, जॉब, कॅरियर के बारे में चिंता, अपने किए पर पछतावा और गलती सुधारने का उपाय आदि सवाल पूछे। कई कैदियों ने अपना अपराध कबूल करते हुए पूर्ण वैराग्य की बात भी की। संस्था का मानना है कि जेलों में भगवान बसते हैं। इसी सोच के तहत जेलों में कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने उन्हें गीता भेंट की और उनके मन मस्तिष्क को तनाव मुक्त करने का उपाय बताया। कैदियों को आध्यात्मिक रूप से आचरण परिवर्तन के गुर सिखाया गया।

इस दौरान इस्कॉन की ओर से नेशनल कम्युनिकेशन हेड ब्रजेंद्र नंदन दास ने कैदियों को गीता का उपदेश दिया और कहा कि कारागार में ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। उन्होंने सभी कैदियों को ईश्वर में श्रद्धा रखने की बात को गंभीरता से बताया और जागरूक कर नया जीवन जीने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के आखिर में कैदियों के आत्म शुद्धिकरण के लिए महाप्रसाद एवं श्रीमद्भागवत गीता का वितरण किया गया।

जेल अधीकक्षक शिवेंद्र प्रियदर्शी ने कहा कि ऐसे आयोजन से जेल के अंदर बेहतर माहौल के निर्माण में सहायक होंगे।मौके पर नंद गोपाल दास के अलावा जेल के कई अधिकारी भी उपस्थित थे।

बेउर जेल में भगवद् गीता बांट कर लौटते नागमणि अन्य।