नासा की धुन पर थिरके इंजीनियर
पाटलिपुत्रस्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में सोमवार को जोनासा के अंतिम दिन दिल्ली के नामचीन बैंड नासा ने प्रस्तुति दी। बैंड के अखिल सचदेव मुख्य गायक, सौरभ जैन गिटार प्लेयर, अंकुर भंडारी ड्रम प्लेयर, जीवितेश खरबंदा बास प्लेयर और रोहित कुलकर्णी इलेक्ट्रिक गिटार प्लेयर ने जैसे ही तान छेड़ी, एनआईटी पटना समेत कई संस्थानों के एक हजार से अधिक इंजीनियरिंग विद्यार्थियों ने उनका स्वागत किया। अखिल सचदेव ने जैसे ही मैं तैनूं समझावां की और तोसे नयना जबसे मिले प्रस्तुत किया, विद्यार्थियों ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया।
जोनासा-2014 के दौरान सांस्कृति कार्यक्रम देनेे वाले प्रतिभागी।
जोनासा-2014 के दौरान पिछले चार दिनों तक हुए सभी प्रतियोगिता के लिए विद्यार्थियों के साथ बेस्ट कॉलेज को भी पुरस्कृत किया गया। सबसे बेहतर डिजाइन के लिए गितम स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर, बीआईटी मिश्रा, पिलो मोदी कॉलेज ऑफ आर्किटेक्टर ओडिशा, गली क्रिकेट के लिए जीबीटीयू लखनऊ, सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए आईआईटी खड़गपुर के डांस, एमईटी मुरादाबाद के फैशन, जीसीए गुवाहाटी को विशेष पुरस्कार दिया गया। पिलो मोदी कॉलेज ऑफ आर्किटेक्टर को ओवरऑल विनर चुना गया। फर्स्ट रनअप गितम स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर और सेकेंड रनअप एमईटी मुरादाबाद को चुना गया।
हरियालीयुक्त भवनों को मिले अधिक महत्व
मधुबनी पेंटिंग पर कार्यशाला
जयपुर से ग्रीन हाउस पर व्याख्यान देने पहुंचे आर्किटेक्ट जितेंद्र सिंह ने बताया कि भवनों के निर्माण में मुख्य रूप से तीन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। अच्छा स्वास्थ्य, कम लागत वाली डिजाइन और बिल्डिंग मार्केटिंग की खास व्यवस्था आदि पर ध्यान देना चाहिए। भवन निर्माण के समय जीरो इनर्जी बिल्डिंग, बाहरी हवा का लगातार प्रवाह, वर्षा जल संरक्षण और फंगस फ्री पर काम करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को निर्माण में आने वाली कई परेशानियों के बारे में बताया। साथ ही कहा कि आने वाले समय में सबको बेहतर आर्किटेक्ट बनना है, इसके लिए अभी से कड़ी मेहनत करें और अपने सपने को साकार करने के लिए तैयार हो जाएं।
आर्किटेक्ट गीता बालाकृष्णन ने मधुबनी पेंटिंग कार्यशाला आयोजित की। उन्होंने लोगों को बताया कि मधुबनी पेंटिंग देश से लेकर विदेशों तक अपनी अलग पहचान रखती है। यह कला सरल तरीके से परंपरा को खास योग्यता के साथ प्रदर्शित करती है।