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नालंदा से पुराना था तेल्हाड़ा का विश्वविद्यालय
प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय से भी पुराना था तेल्हाड़ा में स्थित श्री प्रथम शिवपुर महाविहार विश्वविद्यालय। यहां मिली ईंटों और मुहरों से विश्वविद्यालय की सही अवधि और नाम का खुलासा हुआ है।
तेल्हाड़ा नालंदा जिले के एकंगरसराय में स्थापित है। इसकी खुदाई 2009 से चल रही है। यह प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर है। यहां स्थित विश्वविद्यालय की स्थापना कुषाण काल अर्थात् प्रथम शताब्दी में हुई थी। जबकि, प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना चौथी-पांचवीं शताब्दी में हुई थी।
कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के सचिव आनंद किशोर ने शनिवार को ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आर्किलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से यहां व्यापक शोध की मांग करेगी, ताकि बिहार में एक और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऐतिहासिक और गौरवशाली विरासत के बारे में लोगों को और जानकारी मिले। तेल्हाड़ा में इसी माह फिर खुदाई शुरू होगी, जो छह माह तक चलेगी।
खुदाई में 4 मुहरें मिलीं
खुदाईमें पहली बार वहां की मुहर मिली, जिस पर विवि का नाम लिखा है -श्री प्रथम शिवपुर महाविहारीयाये भिक्षु संघ। नाम ब्राह्मणी लिपि में लिखा हुआ है, जिसका अर्थ जानने के लिए कोलकाता भेजा गया था। खुदाई में चार मुहर मिली हैं, जो टेराकोटा (एक प्रकार की मिट्टी) के बने हैं। इसमें एक चक्र, दो हिरण का चित्र है और नीचे में विवरणी है।
ईंट से पता चला समय
खुदाईमें विश्वविद्यालय भवन के निर्माण में इस्तेमाल की गई ईंट से यह जानकारी मिली है। इस ईंट की लंबाई 42, चौड़ाई 32 और ऊंचाई छह सेंटीमीटर है।
ऐसी थी महाविहार विवि की बनावट
चाइनीज यात्री इत्सिंग द्वारा सातवीं शताब्दी में इस तेल्हाड़ा स्थित इस विश्वविद्यालय के बारे में लिखी गई कई बातें इस खुदाई में सही साबित हुई हैं। जैसे यहां तीन मंदिर थे। तीन बड़े-बड़े हॉल थे। मठ में छोटी-छोटी पीतल की घंटियां लगी हुई थीं। खुदाई में इन सभी बातों का प्रमाण मिला है।
खुदाई में मिली मुहर से चला पता, श्री प्रथम शिवपुर महाविहार था विवि का नाम
गौरवशाली विरासत