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गोडसे को राष्ट्रपिता नहीं बनने देंगे : तुषार गांधी
गोडसे को किसी भी कीमत पर राष्ट्रपिता नहीं बनने देंगे। देश के प्रगतिशील लोगों को मजबूरन कांग्रेस को धर्मनिरपेक्ष पार्टी मानना पड़ रहा है। भाजपा सांसद साक्षी महाराज द्वारा गोडसे की प्रशंसा करना पार्टी की सोची-समझी रणनीति है। इसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी बड़ा सवाल खड़ा करता है। तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक पार्टियां संसद ठप करना जानती है, पर गोडसे के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से कोई सवाल नहीं पूछ रहा है। अतिवादी संगठन विशेष रणनीति के तहत देश में काम कर रहे हैं। देश की गद्दी पर सत्तासीन पार्टी धीरे-धीरे भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की तरह कदम बढ़ा रही है। उसकी आस्था संविधान में होकर गीता में है। आने वाले दिनों में गीता के सिद्धांत पर ही यह सरकार काम करना शुरू कर देगी। ये बातें समाजसेवी गांधीजी के पौत्र तुषार गांधी ने शनिवार को आईएमए हाल में सीपीआई द्वारा आयोजित साझा भारत : साझी विरासत कार्यक्रम में कहीं।
उन्होंने कहा कि देश को तोड़ने वाली विचारधारा और पार्टी का विरोध हमलोग सही तरीके से नहीं कर रहे हैं। वक्त गया है कि हम अपनी कमजोरियों की पहचान करें। सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए हमें सजग और अपने विचारों को लेकर कट्टर बनना होगा। आज का वक्त कट्टर उदारवाद का है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए भाकपा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने कहा कि गांधी के कातिल ने उन्हें अगवा कर लिया है। नरेंद्र मोदी की सरकार हिटलर के कदमों पर चल रही है। एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. डीएम दिवाकर ने कहा कि यह सरकार सभी लाभ वाली सरकारी कंपनियों को बेचने की तैयारी कर रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भाकपा के वरिष्ठ नेता जब्बार आलम तथा संचालन डॉ. शकील ने किया। मौके पर माकपा के राज्य सचिव राजेंद्र प्रसाद सिंह, मानवाधिकार एक्टिविस्ट कॉलिन गोजांलवेस, एनएफआईडब्लू की महासचिव एनी राजा, प्रो. विनय कंठ, अरशद अजमल, डॉ. खगेंद्र ठाकुर, सर्वोदय शर्मा, अरुण कुमार सिंह और वकील ठाकुर थे।
साझा भारत-साझी विरासत कार्यक्रम में अतुल अंजान, तुषार गांधी अन्य।