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गंगोत्री का गंगा में एक बूंद पानी नहीं : मंत्री
जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि फरक्का बराज बनने से बिहार में बाढ़ की समस्या पहले की अपेक्षा भयावह हुई है। फरक्का से फायदा कम, नुकसान अधिक हो गया। केंद्र फिर से गंगा नदी में कई और बराज की योजना पर काम कर रही है। यह गंगा को मारने जैसा होगा। प्रस्तावित बराज से गंगा का प्रवाह पूरी तरह रुक जाएगा और उसके वजूद पर ही संकट उत्पन्न हो जाएगा। केंद्र के समक्ष कई बार यह समस्या उठाई गई है। मंत्री ‘उत्तर बिहार की नदियों में बाढ़ पूर्वानुमान : चुनौती और समाधान’ विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन इंडियन वाटर रिसोर्स सोसायटी बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकार ने संयुक्त रूप से किया था।
मंत्री ने कहा कि इलाहाबाद से हल्दिया के बीच जल परिवहन के लिए तीन-चार बराज की योजना बनाई गई है। इसके लिए कई स्ट्रेच (हल्दिया-फरक्का, फरक्का-पटना, पटना-बक्सर, बक्सर-गाजीपुर- इलाहाबाद के बीच) पर अध्ययन हो रहा है। योजना के पहले गंगा की हालत देख लेनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर हैरत जताई कि बिहार को बिना विश्वास में लिए ऐसी योजना कैसे बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार के लिए यह असह्य है। गंगा नदी में अभी ही इतना गाद जमा हो गया है कि नदी बीच में ऊंची हो गई है। यह खतरनाक है। उन्होंने गाद प्रबंधन नीति बनाने का भी सुझाव दिया। चौधरी ने कहा कि आज बिहार में जो गंगा बह रही है, उसमें गंगोत्री की एक बूंद पानी नहीं है। इसमें घाघरा, यमुना, चंबल आदि नदियों का पानी है। गंगा की विशेषता खत्म होती जा रही है। उन्होंने बराज बनाने की शुरुआत डाउन स्ट्रीम से करने की भी सुझाव दिया।
सेमिनार को संबोधित करते बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकार के उपाध्यक्ष अनिल सिन्हा। साथ में हैं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, सचिव दीपक कुमार सिंह प्रो. संतोष।
सेमिनार | फरक्का बराज से बढ़ी बिहार की समस्या
पहला सत्र : केंद्रीयजल आयोग के निदेशक विष्णुदेव राय ने कहा कि नदियों के जलस्तर मापन के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग होना चाहिए। नागरिकों को सजग करना हमारी प्राथमिकता हो। नेपाल के जलसंसाधन विभाग के पूर्व महानिदेशक प्रकाश पाउडेल ने नदी के साथ बालू प्रबंधन को आवश्यक शर्त बताया और कहा कि भारत-नेपाल मिलकर इस समस्या के समाधान में सक्षम हैं। सत्र की अध्यक्षता प्रो. त्रियुगी प्रसाद ने की।
दूसरासत्र : डीएचआईके प्रबंध निद