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सीबीआई के बिहारी निदेशक से उम्मीद

7 वर्ष पहले
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और अंत में

सीबीआई के नए निदेशक अनिल कुमार सिंहा ने कहा है कि ‘आज देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जो माहौल है, उसमें हमसे उम्मीदें बढ़ गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि हम ठीक से काम करें और हमारे काम में कोई गलती नहीं हो।’ यदि सिंहा अपनी बात पर जमे रहे तो इससे सिर्फ जांच एजेंसी की साख बढ़ेगी, बल्कि बिहार का भी नाम रोशन होगा। याद रहे कि सिंहा भोजपुरी भाषी डुमरांव के मूल निवासी हैं। सीबीआई के पहले बिहारी निदेशक राजदेव सिंह भी भोजपुरी भाषी सारण जिले के थे। वे जून, 1979 में निदेशक बने थे। पर 1980 में केंद्र में जैसे ही सत्ता बदली, वे हटा दिए गए। दिवंगत सिंह कर्तव्यनिष्ठ अफसर थे। उनके समकालीन अफसर बताते हैं कि यदि उन्हें निदेशक पद पर बने रहने दिया गया होता तो सीबीआई की साख बढ़ती। तत्काल बाद के निदेशकों पर आरोप लगे कि वे राजनीतिक मास्टर के इशारे पर काम करते रहे।

चेतनभगत बनाम डुमरांव परिवार

फिल्मअभिनेता देवानंद ने ‘स्वामी दादा’ फिल्म बनाई थी। पटना के एक लेखक धर्मदेव ‘अपना’ ने पटना की अदालत में देवानंद पर केस कर दिया। आरोप था कि उनकी कहानी चुराकर यह फिल्म बना ली गई। इस मामले में देवानंद को समझौता करना पड़ा। तय हुआ कि बंबई में रहकर ‘अपना’ कोई अन्य कहानी लिखेंगे और देवानंद उस पर फिल्म बनाएंगे। देवानंद के खर्चे पर लंबे समय तक धर्मदेव बंबई में रहे भी। पर देवानंद अपना वादा पूरा नहीं कर सके। अब एक मामला चेतन भगत का है। उन्होंने डुमरांव राज के बारे में अपनी किताब में ऐसी बातें लिख दी हैं जिन पर महाराज के वंशजों को एतराज है। चेतन को लीगल नोटिस मिला है। चेतन भगत समझौते के मूड में हैं। वे डुमरांव की सेवा करना चाहते हैं। पता नहीं, वे कितनी और कैसी सेवा कर पाएंगे? पर लगता है कि राज परिवार माफी के बिना उन्हें नहीं छोड़ेगा। ऐयाश राजा-महाराजाओं पर दीवान जरमनी दास की चर्चित पुस्तकें बहुत पहले चुकी हैं। चेतन उनमें से कोई पात्र या स्थान उठा सकते थे। पता नहीं क्यों देवानंद और चेतन भगत जैसे अत्यधिक लोकप्रिय और समझदार लोग भी ऐसी लापरवाही बरतते रहे हैं?

सदाचारकी लहर बनाम भ्रष्टाचार का समंदर

स्वच्छछवि, सादगी और सदाचार की लहर पर सवार होकर सत्ता में आई ममता बनर्जी की सरकार पार्टी भ्रष्टाचार के आरोपों के समंदर में डूब गई है। तृणमूल कांग्रेस सारदा चिट फंड घोटाले से निकलने के लिए हाथ-पांव मार रही है