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जातियों का बंधन तोड़ थाम रहे एक-दूजे का हाथ

6 वर्ष पहले
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पटना. बदलते समय के साथ बिहार भी कदमताल कर रहा है। हर क्षेत्र में। सामाजिक क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव शुरू हो गया है। यहां अंतरजातीय विवाहों की स्वीकार्यता बढ़ने लगी है। आंकड़े इस तरफ इशारा कर रहे हैं। अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को प्रोत्साहन देने के लिए बिहार सरकार की तरफ से दिए जा रहे मुआवजे के लिए रहे आवेदनों में समाज के बदलाव की यह तस्वीर दिख रही है। लोग अब जाति के बंधन को तोड़कर एक-दूजे का हाथ थाम रहे हैं।

मुआवजे के लिए शादी के एक माह के अंदर आवेदन दें

अंतरजातीयविवाह करने वालों जोड़ों को पहले मुआवजे के लिए आवेदन करने के लिए समय का बंधन नहीं था। पर, अब इसे एक महीने कर दिया गया है। मतलब यह कि शादी के एक महीने के भीतर आवेदन करने पर ही मुआवजे का लाभ मिलेगा। समाज में इसे लेकर जागरुकता की भी कमी है। इस कारण भी अभी आवेदन करने वालों की संख्या कम है।
वहीं कागजों के सत्यापन की जटिल प्रक्रिया के कारण भी अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़े इसका लाभ नहीं उठा पा रहे। लोग जगरूक होंगे तो मुआवजे के लिए आवेदन की संख्या भी बढ़ेगी।

बाल संरक्षण इकाई के दीपक कुमार के मुताबिक- अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को 50 हजार रुपए मुआवजे के रूप में दिया जा रहा है। बाल संरक्षण इकाई कार्यालय से अब तक करीब 24 जोड़ों को मुआवजे के लिए चयनित किया जा चुका है। करीब 15 जोड़ों के दस्तावेज सत्यापन की अंतिम चरण में हैं। दरअसल, मुआवजा देने की लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कागजात की जांच से लेकर जोड़ों की उपस्थिति तक अनिवार्य है। बाल संरक्षण इकाई से पहले यह मुआवजा राशि समाज कल्याण विभाग की तरफ से दी जाती थी लेकिन तब सिर्फ 25 हजार रुपए मुआवजा दिया जाता था।

पहले जहां अंतरजातीय विवाह के लिए कभी-कभी आवेदन आते थे, अब हर महीने औसतन 4-5 अंतरजातीय जोड़े मुआवजे के लिए आवेदन कर रहे हैं। पिछले छह महीने में ही 27 से अधिक आवेदन बाल संरक्षण इकाई को मिले हैं। अब तक ऐसे करीब 233 जोड़ों ने आवेदन किया है। बाल संरक्षण कार्यालय इकाई के अधिकारियों के मुताबिक- कई मामलों में ऐसे माता-पिता पहुंचे हैं, जो अब तक शादी के विरोधी रहे हैं। पर, अब धीरे-धीरे इसमें परिवर्तन दिख रहा है। पहले अभिभावक अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते थे पर, अब सीधे स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि अभी यह संख्या कम है लेकिन इससे आस बंधती है।