पटना. महिला हेल्पलाइन की तरफ से काउंसिलिंग और डिजाइनर मशीनों के उपलब्ध कराए जाने से दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा की शिकार राजधानी की 100 महिलाओं की जिंदगी ने नई करवट ली है। अब वे आत्मनिर्भर हैं। अपने बच्चों को पढ़ा पा रही हैं। समाज में आगे बढ़ने के सपने देखने लगी हैं। अब ससुरालवाले भी महत्व दे रहे हैं। इतना ही नहीं अब ये महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठा रही हैं।
महिला हेल्पलाइन की डिजाइन मशीनों की मदद से घरेलू हिंसा की शिकार 100 महिलाओं की जिंदगी ने ली नई करवट
केस-1
दूसरों को सिखा रहीं सिलाई
पति पीटता था। दहेज के लिए ससुराल वाले प्रताड़ित करते थे। ससुराल में जीना दूभर हो गया तो शिवपुरी निवासी पीड़िता ने महिला हेल्पलाइन की मदद ली। हेल्पलाइन की तरफ से ससुरालवालों की काउंसिलिंग की गई, तो उनके व्यवहार में बदलाव आने लगा। महिला हेल्पलाइन और बिलिवर्स चर्च की मदद से डिजाइनर मशीनें भी मिल गईं। अब वह आत्मनिर्भर हैं। दूसरों को सिलाई सीखा रही हैं।
केस-2
बच्चों का सपना करूंगी पूरा
खाजेकलां थाना निवासी महिला को पति की मौत के बाद ससुराल वाले पीड़ित करने लगे। उसके घर पर भी कब्जा कर लिया। महिला ने हेल्पलाइन में शिकायत की। हेल्पलाइन की काउंसिलिंग के बाद ससुरालीजनों ने अपना लिया, लेकिन खर्चा चलाना अब भी मुश्किल हो रहा था। उसने मदद के लिए हेल्पलाइन में गुहार लगाई। हेल्पलाइन और बिलिवर्स चर्च की तरफ से डिजाइनर मशीन मिलने के बाद जिंदगी बदल गई है। कहती हैं-अब मैं अपने बच्चों का सपना पूरा कर पाऊंगी।
केस-3
निकाल रहीं घर का खर्च
पति शराब का आदी है। परिवार से कोई मतलब नहीं। ससुराल वाले प्रताड़ित करते हैं। सहेलियों की मदद से पटना निवासी पीड़िता ने हेल्पलाइन में गुहार लगाई। हेल्पलाइन की तरफ से ससुरालवालों और पति को बुलाकर काउंसिलिंग की गई। जैसे-तैसे प्रताड़ना कम हुई, लेकिन घर का खर्चा कैसे चले? हेल्पलाइन ने आर्थिक मदद के रूप में डिजाइनर सिलाई मशीन दी तो फिर जिंदगी आसान हो गई। अब वह सिलाई, पीको, इंटरलॉक आदि करके घर का खर्च निकाल रही हैं। ससुरालवाले भी खुश हैं।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसे प्रयास करना हमारी प्राथमिकता है। हम हेल्पलाइन में आर्थिक मदद के लिए आई महिलाओं को हर संभव मदद को तैयार रहते हैं। महिलाओं के विकास के लिए इस तरह की और कई योजना हैं। - प्रमिलाकुमारी, प्रोटेक्शन इंसपेक्टर, महिला हेल्पलाइन
कल जिनकी जिंदगी में सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा था, आज वे खुशी-खुशी मिलती हैं। आत्मनिर्भर हुई हैं। अपने फैसले खुद ले रही हैं। डिजाइन मशीनों ने उन्हें बहुत मदद की है। हमें खुशी है कि हेल्पलाइन के प्रयास से समाज की शोषित महिलाओं की जिंदगी बदल रही है। -साधना सिंह,काउंसलर, महिला हेल्पलाइन