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विशेष राज्य का दर्जा मांगा

6 वर्ष पहले
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पटना. मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्जा मांगा है। रविवार को दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि संसाधनों की कमी के बावजूद बिहार में समावेशी विकास के लक्ष्य को सामने रखकर सुशासन के लिए कई कदम उठाए गए। इसके बावजूद बिहार सामाजिक-आर्थिक सूचकांकों के न्यूनतम स्तर पर है, क्योंकि यहां प्रति व्यक्ति सार्वजनिक निवेश सबसे कम है। नीति आयोग के जरिए हमें एक ऐसा मंच मिलना चाहिए, जहां केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच लगातार संवाद हो सके।

निजी क्षेत्र में भी निवेश बढ़े

मुख्यमंत्रीने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के प्रयास तभी सफल होंगे, जब सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र के निवेश में भी वृद्धि हो। पिछड़े क्षेत्रों में निजी निवेश को तभी आकर्षित किया जा सकता है जब हम उन क्षेत्रों में निवेश के लिए विशेष आकर्षण पैदा करें। यह बिहार जैसे राज्य के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, जो प्रत्येक वर्ष बाढ़ एवं सुखाड़ से प्रभावित होता है। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त हो जाने से केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्यांश कम हो जाने से राज्य के पास अपनी योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधन की बढ़ोतरी होगी।
अन्य बाह्य स्रोतों से संसाधन प्राप्ति की क्षमता भी बढ़ेगी तथा करों एवं करदेयता में छूट के कारण निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा। इन्हीं कारणों से बिहार की जनता के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की जा रही है। इसके बिना पिछले 9 वर्षों के दौरान प्राप्त की गई विकास दर को बनाए रखना संभव नहीं हो पाएगा। रविवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री के साथ नीति आयोग की बैठक में शिरकत करते मुख्यमंत्री।

बिहार को हुआ नुकसान

मुख्यमंत्रीने कहा कि मनरेगा, सर्व शिक्षा अभियान, माध्यमिक शिक्षा अभियान, इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, खाद्य सुरक्षा जैसी योजनाओं में इस वर्ष बड़ी कटौती का सामना बिहार को करना पड़ रहा है। नीति आयोग को अपनी तकनीकी क्षमता इस प्रकार विकसित करनी होगी कि वैसे राज्यों में अतिरिक्त संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए क्षमता का संवर्धन करने में पूरा सहयोग दे सके। बिहार में आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

विशेष सहायता देनी होगी

मुख्यमंत्रीने कहा कि बिहार जैसे राज्यों के नागरिकों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध करा पाने और बिहार राष्ट्रीय औसत के बीच जो खाई है उसको पाटने में सफल होंगे, इसकी हम कैसे उम्मीद करें। भारत को प्रगति करना है और उस प्रगति को निरंतरता प्रदान करनी है तो बिहार और अन्य पिछड़े राज्यों को भी साथ लेकर चलना होगा। देश को उन्नति के नए शीर्ष पर पहुंचाना है तो बिहार जैसे सभी पिछड़े राज्यों को एक राष्ट्रीय निर्धारित मापदंड के आधार पर बूस्टर के रूप में सहायता देनी होगी।

ज्यादा योजनाएं नुकसान देह

पुरानी सभी योजनाओं को उनके वर्तमान स्वरूप में रखा जाए। जरूरत हो तो उन्हें संशोधित किया जाना चाहिए। योजनाओं की सूची लंबी होते जाने से यह खतरा है कि गरीबों के लाभ की योजनाओं का आवंटन कम हो जाएगा।

बसावट आधारित बने योजना

मुख्यमंत्रीने कहा कि ग्रामीण स्तर से योजनाएं तैयार करने की बात की गई है। यह तभी संभव होगा जब हम प्रत्येक व्यक्ति और बसावट के स्तर पर आर्थिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के मापदंड निर्धारित करें।

12वीं पंचवर्षीय योजना रहे चालू

मुख्यमंत्रीने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना काल में हमारी सारी विकास की रणनीतियां पंचवर्षीय योजना हेतु प्रतिबद्ध हैं। यदि इसमें परिवर्तन होता है तो हमारी योजना की रणनीति, हमारे विकास कार्यक्रमों एवं चल रही परियोजनाओं में भ्रम और रुकावट पैदा होगी।

ऐसे हो संसाधनों का विभाजन

मुख्यमंत्रीने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच संसाधनों का विभाजन वर्ष 2011 की जनगणना को आधार मानकर किया जाए।