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गुरु-शिष्य परंपरा के तहत तैयार हो रहे नए कलाकार

6 वर्ष पहले
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राज्यपुरस्कार प्राप्त मधुबनी पेंटिंग के कलाकार राजकुमार लाल बैंक रोड स्थित अपने घर में बतौर गुरु मधुबनी पेंटिंग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। 15 प्रशिक्षु उनसे प्रशिक्षण ले रही हैं। वह उन्हें इस कला में बॉर्डर बनाना, चित्रों का रेखांकन करना, रंगों का संयोजन समेत विभिन्न आयाम की जानकारी दे रहे हैं। उनकी बारीक नजर प्रशिक्षुओं द्वारा बनाई जा रही पेंटिंग पर रहती है। किसी ने जैसे ही कोई गलती की, वह उसे तुरंत सुधारने को कहते हैं।

गुरु-शिष्यपरंपरा योजना

राज्यमें मधुबनी पेंटिंग सहित कई पारंपरिक लोक कला के नए कलाकार तैयार हो रहे हैं। यह सब हो रहा है भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से। उसके द्वारा राज्य में गुरु-शिष्य परंपरा योजना के तहत पारंपरिक लोक कलाओं से नए लोगों को जोड़ने के लिए उन्हें मशहूर कलाकारों की देखरेख में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बिहार में मंत्रालय के दो हस्तशिल्प सेवा केंद्र हैं, पहला पटना में और दूसरा मधुबनी में। पटना जोन में यह योजना पांच जगहों पर चलाई जा रही है।

मधुबनी पेंटिंग

बैंक रोड में मधुबनी पेंटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त करतीं महिलाएं।

पारंपरिक लोक कलाओं से नए लोगों को जोड़ने की पहल, पटना जोन में 5 जगहों पर चल रही योजना

पटना जोन में शहर के बैंक रोड में राजकुमार लाल और श्रीकृष्णानगर में जितेंद्र कुमार मधुबनी पेंटिंग का प्रशिक्षण दे रहे हैं। नौबतपुर में रामकेवल प्रसाद बेनू शिल्प (बांस से बनने वाले), भागलपुर में अहिल्या देवी गुड़िया शिल्प, गया में धीरज वर्मा काष्ठ कला का प्रशिक्षण दे रहे हैं। सभी 15-15 शिष्यों को प्रशिक्षण दे रहें हैं। ज्यादातर गृहणियां हैं। गुरुओं को 20-20 हजार रुपए मंत्रालय की ओर से दिए जाते हैं। प्रशिक्षणार्थी को भी प्रोत्साहित करने के लिए 100-100 रुपए रोजाना दिए जाते हैं। राजकुमार लाल कहते हैं कि योजना से बिहार की पारंपरिक कलाओं से नए लोग जुड़ रहे हैं। इससे यह कला विकसित होकर फैलेगी।

चार माह का प्रशिक्षण

हस्तशिल्पसेवा केंद्र, पटना में सहायक निदेशक सैयद मोहम्मद नसीर ने कहा कि लोक कलाओं के विकास नए कलाकार तैयार करने के लिए योजना शुरू की गई है। इसमें चार महीने तक गुरु अपने घर पर ही प्रशिक्षण देते हैं।