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कैंपस चहारदीवारी के लिए हो रहा फंड का इंतजार

6 वर्ष पहले
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नालंदाओपन यूनिवर्सिटी के स्थायी कैंपस का निर्माण अब तक फाइलों में ही दौड़ रहा है। इसके स्थाई कैंपस पर जिच बरकरार है। यह नालंदा में आवंटित भूमि पर बनेगा या फिर पटना में नई व्यवस्था होगी, यह मसला सुलझा नहीं है। दोनों पर इससे जुड़े लोगों के अलग अलग मत हैं।

दिसंबर में एनओयू के सिल्वर जुबली समारोह में शिक्षामंत्री वृशिण पटेल ने नालंदा में एनओयू के स्थायी कैंपस की चहारदीवारी निर्माण के प्रस्ताव को मौखिक मंजूरी देते हुए राशि विमुक्त करने का निर्णय सुनाया। लेकिन दो हफ्ते के भीतर एनओयू के दीक्षांत समारोह में शिक्षामंत्री ने इसके स्थायी कैंपस को पटना में बनाने के संकेत दिए।

‘बेहतरीके लिए हो रहा प्रयास’

सूत्रोंकी मानें तो नालंदा स्थित जमीन पर चहारदीवारी के लिए मंजूर किए गए प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लग गई है। इस कारण नए सत्र में भी एनओयू का काम पुराने भवन से चलेगा। हालांकि, कुलपति डॉ. रासबिहारी सिंह अभी भी आशान्वित हैं। उन्होंने बताया कि हम विश्वविद्यालय की बेहतरी के प्रयास कर रहे हैं। स्थायी कैंपस जहां मिलेगा, काम शुरू करेंगे। कुलपति ने बताया कि अभी तक चहारदीवारी का पैसा भी नहीं मिल सका है, ताकि काम शुरू हो। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी भवन निर्माण कार्य भी शुरू कराने की दिशा में हम आगे बढ़ेंगे।

कैंपस की स्थिति

नालंदामें एनओयू को शिफ्ट करने पर कई बार चर्चा हुई। इस पर अंदरखाने में इससे जुड़े लोग विरोध भी जताते रहे हैं। पूर्व कुलपति वीएस दूबे भी नालंदा में एनओयू को शिफ्ट करने के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने शिक्षामंत्री को कहा भी है जिसके बाद शिक्षामंत्री ने पटना में इसे रखने पर विचार शुरू किया है।

नालंदाजाने से नुकसान

एनओयूकोई क्षेत्रीय विश्वविद्यालय नहीं है, जहां सीमित क्षेत्र से ही विद्यार्थी आते हैं। पूरे बिहार के विद्यार्थी यहां पढ़ते हैं। पटना में इसके होने से सभी शहरों से कनेक्टिविटी समान है। नालंदा में इसके शिफ्ट हो जाने से नॉर्थ बिहार के विद्यार्थियों के लिए दूरी कनेक्टिविटी एक समस्या हो सकती है।