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‘भ्रष्टाचार की जड़ है काला धन’

6 वर्ष पहले
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राजनीतिकदलों में सुप्रीमो कल्चर लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। धन और बाहुबल के आधार पर चुनाव में जीत से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र पारदर्शिता जरूरी है। एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में राजनीतिक दलों में ‘आंतरिक लोकतंत्र, पारदर्शिता जबावदेही की आवश्यकता’ विषय पर आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने ये विचार रखे।

मुख्य वक्ता केंद्रीय सूचना आयोग के सूचना आयुक्त एएन तिवारी ने कहा कि जबतक देश में काला धन लेने वाले होंगे तब तक चुनाव में काला धन नहीं रुकेगा क्योंकि राजनीतिक दल काला धन स्वीकार करते हैं। काला धन भ्रष्टाचार की जड़ है। पूर्व विधान पार्षद डॉ. शंभु शरण श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र में गरीबों की भूमिका वोट देने तक सीमित रह गई है। राजनीतिक दलों में लोकतंत्र को लेकर इंद्रजीत गुप्ता की रिपोर्ट में आवश्यक सुधार के साथ लागू करने की जरूरत है। चुनाव आयोग को रास्ता निकालना होगा।

प्रणालीमें विकृति

पूर्वविधान पार्षद साहित्यकार प्रेम कुमार मणि ने कहा कि भाजपा और वामदलों को छोड़ कर कांग्रेस, राजद, जदयू, लोजपा सहित अन्य दलों में सुप्रीमो कल्चर है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। भाजपा भी अब सुप्रीमो कल्चर की ओर कदम बढ़ा रही है। भाकपा के यूएन मिश्रा ने कहा आज लोकतांत्रिक प्रणाली में विकृति चुकी है। वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर ने कहा भ्रष्टाचार की जड़ में औद्योगिक घराना है, जो चुनाव में बेहिसाब खर्च करते हैं।

प्रो. मंजरी वर्मा ने कहा कि राजनीति में महिलाओं को 33 प्रतिशत की जगह 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। राजेंद्र नट ने कहा कि आज दलितों पर केंद्रित राजनीति हो रही है। प्रो. रवींद्र रवि संयोजक राजीव कुमार ने भी संबोधित किया।

सेमिनार में बोलते यूएन मिश्रा (बाएं से) शंभु श्रीवास्तव, मिथिलेश कुमार, प्रेम कुमार मणि, आरएस तिवारी अन्य।