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कॉलेजों में छात्राओं का होगा नि:शुल्क नामांकन

7 वर्ष पहले
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अनुसूचितजाति, अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं तथा सभी वर्ग की छात्राओं को राज्य के किसी भी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में नामांकन से समय कोई शुल्क नहीं देना होगा।

यह छूट सामान्य कोर्स के किसी भी विषय के स्नातकोत्तर तक के नामांकन में मिलेगी। शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द ही इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की स्वीकृति ली जाएगी। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस योजना को राज्य में लागू कर दिया जाएगा।

प्रस्ताव में कहा गया है कि नामांकन के समय लगने वाले सभी तरह के शुल्क उक्त कोटि के विद्यार्थियों से नहीं लिये जाएंगे। इस योजना से चार लाख से अधिक छात्र-छात्राएं लाभान्वित होंगे। उक्त कोटि के विद्यार्थियों पर आने वाला पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। जितनी राशि इनके नामांकन से आती, वह संबंधित विश्वविद्यालयों को राज्य सरकार देगी। विभाग द्वारा तैयार प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि उक्त खर्च की राशि विश्वविद्यालयों को देने के लिए अलग प्रक्रिया का निर्धारण होगा।

1990 में मिली थी छूट

विभागद्वारा तैयार प्रस्ताव में यह भी जिक्र है कि 1990 में राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए डिग्री कॉलेजों में सिर्फ शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फीस) से छूट मिली थी। अब इन्हें नामांकन के समय लगने वाले सभी शुल्क से छूट होगी।

कितना है शुल्क

वर्तमानमें स्नातक में सामान्य वर्ग को नामांकन के समय हर वर्ष औसतन 1700 रुपए और स्नातकोत्तर में 2000 रुपए लगते हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों के लिए उक्त शुल्क में करीब 300 रुपए की छूट होती है।

मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार में जदयू शासन के नौ वर्ष पूरा होने पर 25 नवम्बर को नौवां रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए सभी वर्ग जाति की लड़कियोंं को मुफ्त उच्चशिक्षा सुलभ कराने के साथ अनुसूचित जाति जनजाति के छात्रों को मुफ्त उच्चशिक्षा सुलभ कराने की घोषणा की थी। इसी को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया है। अनुमान है कि इस नयी व्यवस्था लागू होने पर खजाने पर 200 करोड़ रुपए से अधिक का बोझ पड़ेगा।