पॉलिटिकल रिपोर्टर|पटना
पॉलिटिकल रिपोर्टर|पटना
जदयूविधानमंडल दल की बैठक में विधायकों की तरफ से यह मांग गूंजी कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को पार्टी से निकाला जाए। विधायकों का कहना था कि जदयू के गद्दार नहीं बख्शे जाने चाहिए। ऐसे तमाम लोग, चाहे वे जो हों, पर कार्रवाई हो। हालांकि यह सब बस मांग तक सीमित रहा। बैठक में नीतीश कुमार को नेता चुनने के अलावा और कोई प्रस्ताव नहीं था। नेता चुने जाने के बाद नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे लगे। बैठक थोड़ी ही देर चली। मीडिया को बुला लिया गया। नीतीश ने इसकी वजह भी बताई-पारदर्शिता। कहा-किसी को शक-शुबहा नहीं रहे। आप लोग (मीडियाकर्मी) देख लीजिए। विधायकों को गिन लीजिए। जान लीजिए कि बहुमत कहां है?
खैर, शरद यादव के भाषण, इसके पहले और बाद में भी कुछ-कुछ विधायक मंच तक जाकर अपनी उक्त मांग दोहराते रहे। वे सर का इस्तेमाल नीतीश के लिए और दादा का उपयोग वशिष्ठ के लिए कर रहे थे। खैर, इसी हिसाब से नारे भी लगते रहे। मंच पर बैठे नेता चुप रहे। बाद में पूछे जाने पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा- बैठक में मांझी जी को केंद्र में रख प्रस्ताव की दरकार नहीं थी। नीतीश जी के चुने जाने का मतलब मांझी जी का हटना ही है। वैसे जहां तक पार्टी द्वारा कार्रवाई की बात है, वह समय और परिस्थिति के अनुसार होगी।