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इंटर के कारण कॉलेजों में सत्र लेट

6 वर्ष पहले
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उच्चशिक्षा को पटरी पर लाने में सत्र का नियमित होना मायने रखता है। बिहार के मामले में यह न्यूनतम योग्यता भी कन्वेंशनल विश्वविद्यालयों के पास नहीं है। पटना विवि को अपवाद मान लें तो राज्य के लगभग सभी विवि के सत्र लेट होते ही हैं। वर्तमान सत्र में भी हर विवि में शैक्षणिक कैलेंडर फेल है। एक ओर पटना विवि में गुरुवार से परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, तो दूसरे विश्वविद्यालयों में परीक्षा की तारीख ही घोषित नहीं हुई है। फॉर्म भरे गए हैं और ही दूसरी प्रक्रिया पूरी हुई है।

इस संबंध में मगध विश्वविद्यालय की शाखा कार्यालय के नोडल पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि आदर्श शैक्षणिक कैलेंडर के मुताबिक अभी तक परीक्षा फॉर्म भरे जाने चाहिए और परीक्षा तारीख घोषित हो जानी चाहिए, लेकिन एमयू में नहीं हो सका है। हालांकि ऐसा नहीं है कि एमयू प्रशासन काम नहीं कर रहा। बल्कि इस देरी का मुख्य कारण इंटर परीक्षा है। विश्वविद्यालय के कॉलेजों में इंटर की भी पढ़ाई होती है, जिसकी परीक्षा तिथियों का कंट्रोल बिहार बोर्ड के पास होता है। 18 फरवरी से इंटर परीक्षा है। अभी एडमिट कार्ड वितरित किया जा रहा है। ऐसे में दूसरे कार्यों में विलंब स्वाभाविक है। हम अभी भी कोशिश कर रहे हैं कि शैक्षणिक कैलेंडर फेल हो, परीक्षा वक्त पर शुरू हो। उम्मीद है कि फरवरी अंतिम सप्ताह से स्नातक तृतीय वर्ष के फॉर्म भरने की शुरुआत हो जाए। परीक्षा संभवत: मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के प्रथम सप्ताह में शुरू हो जाएगा।

इंटर परीक्षा के कारण स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं की परीक्षाओं में विलंब होता है। इससे सत्र विलंब से शुरू होता है, परीक्षाएं वक्त पर नहीं हो पाती है।

कई कॉलेजों के शिक्षकों का कहना है कि इंटर की पढ़ाई को कॉलेजों से नहीं हटाना चाहिए। क्योंकि इससे उन विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षकों का साथ नहीं मिल पाता।

और पढ़ाई क्यों हो

कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई क्यों नहीं

कॉलेजों से इंटर हटना चाहिए

डॉ.कुमार बताते हैं कि कॉलेजों से इंटर की पढ़ाई को समाप्त कर देना चाहिए। दोनों में समानताएं नहीं है। इंटर परीक्षा के लिए केंद्र भी कॉलेजों में होता है जिससे दूसरी कक्षाओं के कार्य संभव नहीं हो पाते या विलंब होता है। राज्य सरकार की पॉलिसी भी इंटर की पढ़ाई को कॉलेजों से हटाने की थी।

2005में बनी थी योजना

राज्यसरकार ने 2005 में इंटर की पढ़ाई को कॉलेजों से समाप्त करने की योजना बनाई। इसके बाद पटना विश्वविद्यालय में इंटर की पढ़ाई बंद हो गई। वर्ष 2006 के बाद से पटना विवि के कॉलेजों में इंटर में नामांकन होना बंद हो गया। दूसरे विश्वविद्यालयों में अभी भी इंटर की पढ़ाई जारी है।