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पढ़ने के लिए अपनाएं वैज्ञानिक तरीके, बेहतर प्रदर्शन करेंगे
पटना|सिर्फ पढ़करऔर रटकर परीक्षा में अच्छा नहीं किया जा सकता है। पढ़ने के और भी तरीके होते हैं जो लाभकारी सिद्ध हुए हैं। दुनियाभर में पढ़ने के तरीकों पर रिसर्च किया जाता रहा है। आज कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बात करेंगे, जिसे वैज्ञानिकों और मनोवैज्ञानिकों ने मान्यता दी है। साइंस और रिसर्च जर्नल पर आधारित पढ़ने के इन वैज्ञानिक तौर-तरीके के बारे में शिक्षाविद् डॉ. सीबी सिंह ने जानकारी दी है।
परीक्षा के दौरान बच्चों को एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। जॉगिंग, डांसिंग या फिर चलने को कहा जाता है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि एक्सरसाइज करने से स्वेटिंग होती है जिससे स्ट्रेस लेवल कम होता है और शरीर में एनर्जी का लेवल बढ़ जाता है। फिजिकल ट्रेनर यह भी मानते हैं कि एक्सरसाइज करने से याददाश्त भी बढ़ती है।
दुनियाभर के मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि परीक्षा के समय 20 से 50 मिनट का स्लॉट बनाकर ही पढ़ना चाहिए। इसमें 5 से 10 मिनट का रिलैक्सेशन ब्रेक जरूर लेना चाहिए। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि टाइम स्लॉट में पढ़ने से दिमाग में चीजें काफी समय तक और स्पष्ट रहती है।
डॉक्टर्स और डायटिशियन सलाह देते हैं कि परीक्षा के समय दूध, हाई फाइबर, स्लो डायजेस्टिंग फूड जैसे दलिया, फल और हरी सब्जियां खानी चाहिए। इसके पीछे यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के सीनियर क्लिनिकल रिसर्चर कैमरुन होलोवे ने रिसर्च किया। उन्होंने पांच दिनों तक कुछ छात्रों को चीज, हाई फैटी फूड, मांस-मछली, अंडा और क्रीम बटर खिलाया। उन्होंने पाया कि छात्रों के ध्यान और सोचने की गति कम हुई है। उन्होंने अपने रिसर्च में यह लिखा कि पढ़ते वक्त मस्तिष्क ग्लूकोज की खपत करता है। इसलिए ऊर्जा और ग्लूकोज देने वाले भोजन खाने चाहिए।
छात्रों को लगातार एक ही जगह पर नहीं पढ़ना चाहिए। पढ़ने की जगह में बदलाव करते रहना चाहिए। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी के रिसर्च के मुताबिक कुछ छात्रों को कुछ शब्दों की सूची दी गई। इसे दो बार पढ़ना था। एक टीम ने इसे दो विभिन्न स्थान पर पढ़ा। दूसरी टीम ने एक ही जगह का प्रयोग किया। यह पाया गया कि पहली टीम का प्रदर्शन ज्यादा बेहतर रहा। इसके पीछे का विज्ञान यह था कि दिमाग पढ़ते वक्त पृष्ठभूमि और अनुभूतियों को भी ग्रहण करता है। इसलिए एक जगह की बजाए लाइब्रेरी, कॉफी हाउस, अध्ययन कक्ष आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।
परीक्षा के दौरान छात्र एक ही विषय को तब तक पढ़ते हैं जबतक उसकी तैयारी पूरी नहीं हो जाती। ऐसा नहीं करना चाहिए। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि जैसे आप एक ही खाना बार-बार खाकर बोर हो जाते हैं, वैसे ही दिमाग एक ही विषय को अधिक समय तक पसंद नहीं करता है। मसलन सब मिक्स करके पढ़ें। पढ़ाई इंट्रेस्टिंग और फ्लेवर्ड होगी।