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पारा मेडिकल में प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव
अनीसाबादबेउर स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च ने रविवार को रजत जयंती समारोह का आयोजन किया। उद्घाटन करते हुए पूर्व मंत्री रघुनाथ झा ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के तहत पुनर्वास-विज्ञान और पारा-मेडिकल में प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव है। संस्थान ने अपने 24 वर्ष के कार्यकाल में इस अभाव को कम किया है। बिहार को इस तरह के संस्थान की लगातार जरूरत थी।
कार्यक्रम में पुनर्वास-विज्ञान मे विशेष योगदान देने वाले 5 विशेषज्ञों को प्रोफेशनल एक्सीलेंस अवार्ड और 17 पूर्ववर्ती प्राध्यापकों को सम्मानित किया। संस्थापक निदेशक डॉ. अनिल सुलभ ने पिछले वर्षों के कार्य के बारे में बताया। पटना विवि के पूर्व कुलपति डॉ. एसएनपी सिन्हा, मगध विवि के पूर्व कुलपति मेजर बलबीर सिंह ‘भसीन’, एसएन सिंह, नृपेंद्र नाथ गुप्त और नृत्याचार्य डॉ. नगेंद्र प्रसाद मोहिनी ने भी विचार रखे।
ये रहे उपस्थित
पूर्वविधायक अजीत कुमार झा, डॉ. अनूप कुमार गुप्ता, डॉ. लक्ष्मी सिंह, डॉ. गीतांजली, डॉ. सीमा कुमारी, आनंद मोहन झा, राज कुमार प्रेमी, योगेंद्र प्रसाद मिश्र, बीपी सिंह तथा सूबेदार मेजर एसके झा समेत हजारों की संख्या में शिक्षक छात्र उपस्थित थे। अतिथियों का स्वागत आकाश सुलभ ने किया।
डॉ. राज कुमारी, डॉ. बक्सी, केआरपी सिन्हा, प्रो. दीपक मिश्रा, डॉ. बॉबी आर कान्त डॉ. एमएच खान को हेल्थ इंस्टीट्यूट प्रोफेशन एक्सिलैंस अवार्ड दिया गया। साथ ही प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस झा, डॉ. आरएन सुमन, डॉ. यूडी तिवारी, डॉ. एनके सिन्हा, डॉ. उदय शंकर प्रसाद, डॉ. जेएल साह, डॉ. निर्मला सक्सेना, डॉ. एसएम कमाल वारिस, डॉ. एके शरण, प्रो. केडी ठाकुर, प्रो. अर्जुन प्रसाद तथा प्रो. विनोद भांटी को पुरस्कृ़त किया गया।