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हर पंचायत-प्रखंड में नहीं जमा करना पड़ेगा आवेदन
नियोजितशिक्षक अभ्यर्थियों को घूम-घूम कर हर पंचायत और प्रखंड में आवेदन जमा करने से अगली बार से मुक्ति मिल सकती है। शिक्षा विभाग अभ्यर्थियों को इस समस्या से राहत देने पर गंभीर मंथन कर रहा है। इसको लेकर शिक्षक नियुक्ति नियमावली में संशोधन किया जाएगा। विभाग को इसका एहसास हो गया है कि हर पंचायत और प्रखंडों में आवेदन जमा किए जाने से ही शिक्षकों की नियुक्ति तीन साल में भी संपन्न नहीं हो सकी। एक-एक अभ्यर्थी ने 40 से 50 जगहों पर आवेदन दिए थे। इस कारण एक ही अभ्यर्थी 50 नियोजन इकाइयों की मेधा सूची में शामिल हुए। एक-एक अभ्यर्थी को छह-छह और आठ-आठ नियुक्ति पत्र मिला। विभाग को समझ में ही नहीं रहा था कि आखिर कितने शिक्षक नियुक्त हुए। दूसरी ओर सीट रहते अन्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित होते रहे। इसी को लेकर आवेदन लेने की केंद्रीयकृत व्यवस्था पर विभाग गंभीरता से विचार कर रहा है। यह व्यवस्था जिला स्तर पर हो सकता है। नवंबर में उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन निकालना है। उम्मीद है इसके पहले नियुक्ति नियमावली में संशोधन कर दिया जाएगा।
इसके अलावा एक संशोधन और किया जाना है, जिसमें दक्षता परीक्षा में दो बार फेल हुए शिक्षकों को एक और मौका दिए जाने का प्रावधान किया जाएगा। वर्तमान नियमावली में दो बार दक्षता परीक्षा फेल करने वाल शिक्षकों की सेवा बर्खास्त करने का प्रावधान है। इस संशोधन से करीब 3000 नियोजित शिक्षकों की नौकरी बच सकती है।
राज्य के शिक्षा मंत्री की ओर से सभी टीईटी पास अभ्यार्थियों को नियोजन में शामिल करने की घोषणा के बाद अभ्यर्थी ऊहापोह की स्थिति में है। बिहार राज्य टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी संघ के संयोजक संतोष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार ने पिछली बार शिक्षकों के नियोजन को उलझा कर रख दिया गया था। इसमें राज्य में लगभग 9 हजार नियोजन इकाइयों में बाट दिया था। जिस कारण अधिक मेघा अंक के अभ्यार्थियों का भी नियोजन नहीं हो सका। कई विषयों में शिक्षकों के सीट रहने के बाद भी नियोजन नहीं हो पाया। सरकार को दूसरी बार नियोजन के ऐसे तरीके से बचना चाहिए। राज्य के शिक्षामंत्री को नियोजन प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से घोषणा करनी चाहिए। इससे अभ्यार्थियों को नियोजन प्रक्रिया की पूरी जानकारी हो सके।