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\"महागठबंधन नहीं भाजपा को वामदल ही रोकेगा\'

7 वर्ष पहले
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अच्छे दिनों का असर हुआ कम

हार पर आत्ममंथन करें भाजपा के स्थानीय नेता : उपेंद्र

परिणाम खुश होने लायक नहीं : शत्रु

भाजपासांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि उपचुनावों के परिणामों में खुश होने लायक नहीं नहीं हैं, लेकिन इससे निराश या हतोत्साहित होने की भी जरूरत नहीं है। इस तरह के परिणाम पहले भी आते रहे हैं। 1984 में भी कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में अपार सफलता मिली थी, लेकिन उसके बाद कई राज्यों के चुनाव में उसकी जबरदस्त हार हुई। भाजपा को देखना होगा कि हमारी रणनीति कहां पर कमजोर पड़ रही है। एक तरफ हम विकास का एजेंडा लेकर आए और उसके आधार पर देश में अपार सफलता मिली। उसके बाद क्या हो गया, जो उत्तराखंड में हार गए। बिहार में भी भरपूर सफलता नहीं मिली। हमारे पास अच्छा नेतृत्व है। नरेंद्र मोदी का करिश्मा है। कमी तो हमलोगों में है। यह देखना होगा कि हम कहां पर खरे नहीं उतरे?

आत्मनिरीक्षण जरूरी

^विधानसभाउपचुनाव में मिली हार के बाद पार्टी को आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है। यह झटका नमो सरकार के 100 दिन होने के बाद लगी है। आत्मनिरीक्षण से पार्टी को दो फायदा होगा, पहला हार के कारण का पता चलेगा और दूसरा आने वाले चुनाव के लिए रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। सीपीठाकुर, राष्ट्रीयउपाध्यक्ष, भाजपा

पटना |राजद नेकई राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा की पराजय को बिहार के महागठबंधन का असर करार दिया है। राजद विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी ने कहा कि देश की जनता ने पीएम नरेंद्र मोदी के शासन को 110 दिनों में ही नकार दिया है। जिस जनता को मोदी ने ठगा, वही जनता इस परिणाम के मार्फत परिमार्जन कर रही है। वैसे भी बिहार में मात्र 29 और देश में 33 फीसदी वोट लाकर विरोधी मतों के बंटवारे से भाजपा ने अधिक सीटें जीत ली थीं।

पूर्वेबोले- नमो से हुआ मोहभंग :

प्रदेशअध्यक्ष डॉ. रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि भाजपा की धार्मिक उन्माद और हसीन सपने दिखाने वाली नीति को लोगों ने नकार दिया है। यह साबित हो गया कि जनता को ज्यादा दिनों तक गुमराह नहीं किया जा सकता है। राष्ट्रीय महासचिव भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि काठ की हांडी दोबारा नहीं चढ़ती। भाजपा आरएसएस के एजेंडे पर काम करती है। उसकी अपनी कोई नीति नहीं है। अभी चुनाव हो जाए, तो नरेंद्र मोदी भी हार जाएंगे। झलकरहा जनता का आक्रोश: इधर,भाकपा माले के राज्य सचिव कुणा