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बेउर जेल के दो अफसरों को लगी फटकार, हाजिर होने का निर्देश

7 वर्ष पहले
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पैक्स चुनाव पर रोक लगाने से इनकार

हाईकोर्टका आदेश नहीं मानना बेउर जेल के अधीक्षक और सहायक अधीक्षक को महंगा पड़ा। कोर्ट ने दोनों को फटकार लगाई। कहा, शोकॉज दायर कर बताएं कि उन्हें क्यों नहीं दंडित किया जाए। मामले पर 9 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी। उस दिन दोनों को हाजिर रहने का निर्देश दिया गया है। न्यायमूर्ति वीएन सिन्हा तथा न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

प्रेम विवाह के एक मामले में कोर्ट ने पति विकास कुमार को बेउर जेल भेजा था। 12 सितंबर को कोर्ट ने पति को रिहा करने का आदेश दिया था। इसकी सूचना महाधिवक्ता के सहायक वकील ने बेउर जेल के अधीक्षक को उसी दिन दे दी थी। उसके बाद विकास कुमार के पिता भी आदेश की प्रति लेकर अधीक्षक से मिले। लेकिन उन्होंने जेल से रिहा नहीं किया। तब पिता ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर जानकारी दी। अर्जी दायर होने के बाद सोमवार को विकास को जेल से रिहा किया गया। इसी मामले में कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को तलब किया था। अपर महाधिवक्ता डीके सिन्हा ने दोनों अधिकारियों का बचाव किया। लेकिन कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। इसका संतोषजनक उत्तर दोनों अधिकारी नहीं दे पाए।

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लोकसभा चुनाव में खर्च की सीमा 40 से बढ़ाकर 70 लाख रुपए किए जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि चुनावी खर्च को संशोधित करने संबंधी अधिसूचना संसद के दोनों सदनों में पेश की जा चुकी है। ऐसी स्थिति में इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति वीएन सिन्हा न्यायमूर्ति पीके झा की खंडपीठ ने इसके साथ ही वकील शशि भूषण कुमार वर्मा की ओर से दायर पीआईएल को निष्पादित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता संसद से पारित होने के बाद चाहें तो उसकी वैधता को चुनौती दे सकते हैं।