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पटना-कुर्ला एक्स. को दानापुर से पटना पहुंचने में लगे दो घंटे
मुंबईसे पटना की प्रमुख ट्रेनों में शुमार पटना-कुर्ला लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस मंगलवार को बैलगाड़ी की चाल चली। मुगलसराय तक यह ट्रेन मात्र 40 मिनट लेट थी। लेकिन, पटना पहुंचते-पहुंचते 3 घंटे 43 मिनट लेट हो गई। हद तो यह हो गया कि दानापुर स्टेशन पहुंचने से पहले इस ट्रेन को आउटर पर रोक दिया गया। दानापुर आउटर के पास ट्रेन सवा 11 बजे पहुंची थी, लेकिन वहां से पटना पहुंचने में दो घंटे लग गए। यही नहीं जब तक ट्रेन रुकी रही एसी भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। सुबह 9.30 बजे पटना पहुंचने वाली पटना-कुर्ला एक्सप्रेस दोपहर बाद 1.15 बजे पटना जंक्शन पहुंची। इस दौरान ट्रेन के अंदर यात्री खासे परेशान रहे। यात्रियों ने बताया कि यह स्थिति सिर्फ मंगलवार की नहीं, कमोबेश हर दिन की यही कहानी है।
फुलवारीशरीफमें अक्सर शंट होती है ट्रेन
मंगलवारको ऐसा नहीं हुआ। लेकिन, पटना-कुर्ला एक्सप्रेस को दानापुर से खुलने के बाद फुलवारीशरीफ में अक्सर शंट कर दिया जाता है। पीछे आने वाली एक्सप्रेस पैसेंजर ट्रेनों को भी आगे निकाला जाता है। इतना ही नहीं बकायदा एनाउंसमेंट होता है कि पटना-कुर्ला लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के यात्री ध्यान दें... यह गाड़ी अभी नहीं जाएगी।
जगह-जगह गंदगी
एकतो ट्रेन धीरे-धीरे सरकने से जल्दी पटना पहुंचने की बेचैनी और उस पर कोच के अंदर जगह-जगह गंदगी। स्लीपर कोच से लेकर एसी कोच के यात्री भी परेशान थे। एसी बोगी के अंदर सीट से लेकर सीट के नीचे और बाथरूम के पास तक जगह-जगह गंदगी पसरा था, जिस वार्डरोब में बेडरॉल कंबल रखे जाते हैं, उसमें कॉकरोच थे। यात्रियों ने बताया कि रास्ते में कहीं सफाई नहीं हुई।
अबतो आदत सी पड़ गई है
मुंबईसे पटना रहे दरभंगा के मो. अबुजर अंसारी काफी गुस्से में थे। कहने लगे, बिहार की सीमा में घुसते ही जाने क्या हो जाता है कि ट्रेनों की चाल थम जाती है। यह ट्रेन दिलदार नगर में सुबह 7 बजे पहुंच गई थी। उसके बाद बक्सर से लेकर हर स्टेशन पर रुकते हुए 10 बजे आरा पहुंची। आरा के बाद तो यह ट्रेन लोकल की तरह हो गई। मुंबई से रहे पटना के वीके ठाकुर ने बताया कि सफाई का इस ट्रेन में कोई मतलब ही नहीं है।
पटना-कुर्ला एक्स्प्रेस की एसी बोगी में सीट के पास बिखरी पड़ी गंदगी। वहीं, नीचे की तस्वीर में एक से दूसरी बोगी में जाने के स्थान पर फैला कचरा।
ट्रेनें ज्यादा हैं, लाइन कम
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