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मोतिहारी के माधोपुर में खुलेगा गन्ना शोध संस्थान
ग्रामीणविद्युतीकरण के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कम क्षमता के 14 हजार टुल्लू ट्रांसफार्मरों को बिहार अपने खर्चे पर बदलेगा। कृषि कैबिनेट की बैठक में सोमवार को मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ऊर्जा विभाग को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत लगे 16 और 25 केवीए के ट्रांसफार्मरों के स्थान पर 63 और 100 केवीए के ट्रांसफार्मर लगाने की योजना तैयार करने का आदेश दिया। गांवों में ट्रांसफार्मरों को बदलने पर 350 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। राज्य के सभी जिलों में कृषि के लिए डेडिकेटेड फीडर की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल नौबतपुर में यह प्रयोग हो रहा है।
बैठक में मोतिहारी के माधोपुर में गन्ना शोध तकनीकी संस्थान की स्थापना का भी फैसला किया गया। सरकारी नलकूपों को चलाने की जिम्मेदारी जल्द ही किसानों को स्वतंत्र रूप से दी जा सकती है। बतौर मुख्यमंत्री मांझी की अध्यक्षता में कृषि कैबिनेट की पहली बैठक करीब साढ़े तीन घंटे तक चली। इसमें किसानों को बैंकों से कर्ज दिलाने और बाजार उपलब्ध कराने से लेकर राज्य में कोल्ड स्टोरेज की संख्या और भंडारण क्षमता बढ़ाने की कार्ययोजना पर भी विचार हुआ।
कृषि कैबिनेट के माध्यम से राज्य में खाद्यान्न, फल, सब्जी, दूध, मछली, अंडा और मांस की वर्तमान खपत को पूरा करने के साथ-साथ वर्ष 2017 और 2022 की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है। पांच साल के भीतर भंडारण क्षमता 65 लाख टन और कोल्ड स्टोरेज की क्षमता 75 लाख टन की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कृषि कैबिनेट से जुड़े विभागों को आवंटित राशि शत-प्रतिशत खर्च करने का आदेश दिया।
प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने बताया कि इस वर्ष तमाम विभागों को 13581 करोड़ रुपए दिए गए हैं। अगस्त तक 4775 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। सबौर-अर्ध-जल प्रजाति के धान के उपयोग पर केंद्र सरकार की मंजूरी ली जा रही है।
{केंद्र द्वारा लगाए 14000 टुल्लू ट्रांसफार्मरों को अपने खर्च पर बदलेगी राज्य सरकार
{किसानों को सिंचाई के लिए न्यूनतम 8 घंटे बिजली {निजी नलकूप बढ़ाने की बनेगी योजना {पैक्स के गोदाम बनाने के लिए स्थान को लेकर नई नीति बनेगी {धान खरीद के लक्ष्य को 20 लाख टन से बढ़ाया जाएगा {पीएमजीएसवाई या सीएमजीएसवाई के दायरे से बाहर की सड़कों का होगा पक्कीकरण।
इस साल भी होगी रिकॉर्ड उपज
कृषिविभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मी