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फैक्ट्री लगाएं, देंगे सुविधाएं

7 वर्ष पहले
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उद्यमीप्रदेश में उत्पादन यूनिट लगाएं, सरकार उन्हें हर तरह की सुविधा मुहैया करवाएगी। लेकिन, राज्य में उत्पादित होने वाली वस्तुओं की गुणवत्ता से सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। कारोबारी अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझते हुए किसी प्रकार की आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी करें। ये बातें मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने पहले सातवीं उद्यमी पंचायत की अध्यक्षता करने के बाद पत्रकारों से कहीं।

मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद कक्ष में उद्यमियों की समस्याएं सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग के प्रधान सचिव को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के लिए कहा। उद्यमियों ने सिंगल विंडो सिस्टम के तहत हो रही परेशानी की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। उन्होंने उद्योग के प्रधान सचिव को अपने स्तर पर समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने विशेष राज्य के दर्जे की मांग को दोहराते हुए कहा कि हमारी यह मांग जारी रहेगी।

मौके पर मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, पीके शाही, नरेंद्र नारायण यादव, अवधेश कुशवाहा, रंजू गीता, शाहिद अली खां, सम्राट चौधरी, विकास आयुक्त एसके नेगी, प्रधान सचिव नवीन वर्मा, आमिर सुबहानी, डॉ. बाला साहब, ब्यासजी, शिशिर सिन्हा, दीपक प्रसाद, संदीप पौंड्रिक, सचिव ऊर्जा प्रत्यय अमृत, डीजीपी पीके ठाकुर आदि मौजूद थे। बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण अग्रवाल और बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने भी बैठक में भाग लिया।

पटना| उद्यमीपंचायत में उद्यमियों ने वाणिज्य कर विभाग के अपीलीय न्यायालयों प्राधिकारों में लंबित वादों के निबटारे के लिए वन टाइल सेटलमेंट (ओटीएस) व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग के साथ इसे हर क्षेत्र में लागू करें। इससे बकाए के बोझ से और बेवजह कागजातों के संग्रह से निजात मिलेगी। सोच-समझकर छापामारी करें, किसी के कहने या बहकावे में कोई कार्रवाई करें। छापामारी करनी ही हो, तो स्पष्ट और सही सूचना के आधार पर करें। बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट पीके अग्रवाल ने बताया कि वादों के निपटारे में व्यापारियों को अनावश्यक खर्च और परेशानी होती है। अगर सरकार ओटीएस लागू करती है, तो इससे राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। मुख्यमंत्री को दिए अपने प्रतिवेदन में उद्यमियों ने कहा कि वाणिज्य कर विभाग जो अर्थदंड लगाता है, उसे कैश में जम